Anchor-अपनी नौकरी को दाव पर लगी देख दिया एक ऐसी वारदात को अंजाम जिसके कारण बिना अपराध के आरोपी एवं मृतक सहित पाच परिवारों के सारे सदस्य इस घटना को शायद जीवन भर भुला न सकेंगे|यह हत्या न्यायालय में विचाराधीन एक मामले को लेकर चली आ रही रंजिश को लेकर सुपारी देकर करवाई गई थी। मुलताई स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर के पुजारी दुर्गाशंकर त्रिवेदी अज्ञात हत्यारों ने नृशंस हत्या कर दी थी। पंडित त्रिवेदी का एक प्रकरण मुलताई न्यायालय में चल रहा था। इसमें उन्होंने ४० हजार रूपए की राशि जमा करने को दी थी। इस राशि की न्यायालय में पदस्थ लिपिक विजय द्विवेदी द्वारा रसीद नहीं दी गई थी। शिकायत पर न्यायाधीश द्वारा द्विवेदी के खिलाफ धारा ४०९, ४२० के तहत प्रकरण पंजीबद्घ करवाया गया था।
v.o1-हत्या का मुख्य आरोपी विजय द्विवेदी है। जिसने राजेश,आरिफ और हबीब के साथ मिलकर 8 फरवरी को शाम साढ़े सात मुलताई स्थित ताप्ती परिक्रमा मार्ग से घर लौट रहे पुजारी दुर्गाशंकर त्रिवेदी की हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। आरोपी विजय 7 फरवरी की शाम को मुलताई पहुंचा था, जहां रात में उसने आरिफ, राजेश और हबीब के साथ शराब-मुर्गे की दावत आयोजित कर पुजारी की हत्या की योजना बनाई थी।
byte-आरोपी(1,2,3)
v.o.2-पुलिस ने मामले की जांच के बाद खुलासा किया कि आरोपी विजय द्विवेदी पहले मुलताई कोर्ट में पदस्थ था, जिसके खिलाफ मृतक दुर्गाशंकर त्रिवेदी की ओर दायर एक मामला कोर्ट में विचाराधीन था। पुलिस के अनुसार आरोपी विजय ने मृतक पुजारी के साथ धोखाधड़ी करते हुए शासकीय पैसा हड़प लिया था, जिसके कारण आरोपी पर धारा 409 और 420 के तहत मामला चल रहा था। इसमें उसकी नौकरी खतरे में पड़ने के साथ ही सजा होने का अंदेशा था। इसके बचने के लिए विजय ने मृतक पुजारी और उसके परिवार पर मामला वापस लेने का दबाव भी डाला था, लेकिन जब सुलह-समझौता नहीं हो सका तो विजय ने पुजारी दुर्गाशंकर को रास्ते से हटाने की ठान हत्या की वारदात को अंजाम दिया
byte-गणेश त्रिवेदी(पुत्र)
byte-डी.एस.भदोरिया(एडी.एस.पी.बैतूल)
v.o.3- इसमें द्विवेदी की गिरफ्तारी भी हुई थी और अभी मामला विचाराधीन है। इसमें समझौते के लिए द्विवेदी द्वारा दबाव डाला जा रहा था क्योंकि उसकी नौकरी पर खतरा मंडरा रहा था। सारे उपाय अपनाने के बाद भी जब द्विवेदी पुजारी को नहीं मना सका तो उसने उसे मौत के घाट उतारने की ठान ली । यहां वह अपने पूर्व परिचित आरिफ ,राजेश एवं हबीब को पुजारी की हत्या के लिए तैयार किया ,षड़यंत्र रचा।अगले दिन अंधेरे का फायदा उठाते हुए इन्होंने उनकी हत्या कर दी और वहां से फरार हो गए। मामले की तह तक पहुंचने में आरोपी राजेश का डॉयलाग खास रहा। सूत्रों के मुताबिक एक व्यक्ति ने घटना के दौरान डॉयलाग सुना था कि "मैं शेर का शिकार करता हूं और हीरों का व्यापार करता हूं।" फिर क्या था, अक्सर यह डॉयलाग बोलने वाले की तलाश की गई और मामले की सारी गुत्थी सुलझ गई।
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