सर्वोदय विचार परिषद् १३२/१ महात्मा गाँधी रोड कोलकाता-७ फो:२२७०७११४, मो:९४३३०२३९९९ : satyagrah2@gmail.com

सर्वोदय विचार परिषद्

१३२/१ महात्मा गाँधी रोड कोलकाता-७ फो:२२७०७११४, मो:९४३३०२३९९९ : satyagrah2@gmail.com

 

आदरणीय गोभक्त श्री

            सादर वन्दे मातरम 

            इस पत्र के साथ 'नवग्रह धूप' के कुछ कागज़ संलग्न है. नवग्रह धूप का आविष्कार,नेड़प काका ने किया था. उनके अनुसार नवग्रह धूप, करोड़ो लोगो को रोज़गार दे सकती है. साथ ही राष्ट्र की आय बहुत बढ़ा सकती है. हम लोग गत कुछ वर्षो से इस पर काम कर रहे है. हमारा अनुभव है कि इसके लाभ अनगिनत है. इससे वातावरण शुद्ध होता है. शुद्ध वातावरण सही निर्णय लेने में सहायक होता है. सही, सटीक, शीघ्र निर्णय से लाभ, शांति बढती है. इस प्रकार कोई व्यक्ति एक साल तक सुबह शाम नवग्रह धूप चेतन करता है तो सुख शांति समृद्धि की बढोतरी स्वयं अनुभव कर सकता है. 

            हम लोग हर गाँव / मोहल्ले  में एक युवा प्रचारक या संस्था की खोज में जो १०००० या ज्यादा नियोजन करे; अपने स्थान के आस पास बैनर टांग दे,पर्चे बंटवा दे, मिलने वालो को नवग्रह धुप वाला विजिटिंग कार्ड दे दे बस इतने से प्रचार हो जायेगा. नवग्रह धूप चेतन करना गोरक्षा का सरलतम उपाय हैइतना ही सरल हैइसका प्रचार करना. सभी गाय को माता/ उपयोगी  मानते है. “गाय हमारी कृषि प्रधान अर्थ व्यवस्था का आधार है. “गाय, मनुष्य बिना जी सकती है. मनुष्य, गाय बिना नहीं जी सकता. सभी गोरक्षा के सरलतम उपाय को अपना सकते है. सभी २.५० रुपया प्रतिदिन = ९०० रु प्रति वर्ष आसानी से खर्च कर सकते है. कलकता वाले हमारे कार्यालय में ९०० रु भेज कर एक कॉम्बी पैक प्राप्त करे. अथवा  फ़ोन पर आदेश लिखवाए. स्थानीय पहुँचाने का खर्च ५०रु तय किया गया है. बहार वाले सिंडीकेट बैंक अकाउंट नम्बर ९५०५२०१०१०३८७० में ९०० + १००(कोरियर खर्च)=१००० रु  जमा करे. अपना नाम पता सूचित करे. विश्वास है कि पत्र मिलते ही आप स्वयं धूप चेतन करना अवश्य प्रारंभ कर देगे. 

            क्या आप प्रचारक बन लोगो को गोरक्षा का सरलतम उपाय अपनाने का सुनहरा मौका देना चाहेगे? या आपकी दृष्टि में कोई योग्य व्यक्ति या संस्था है; कृपया उनका नाम दे. प्रत्येक प्रचारक को १००० पर्चे, १०० विजिटिंग कार्ड, १० बैनर मिलेगे. जिनके सहयोग एवं गौमाता   के आशीर्वाद से मेहनत कश प्रचारक को अवश्य सफलता मिलेगी. सर्व समर्थ से प्रार्थना है "नवग्रह धूप" का प्रत्येक प्रचारक यथाशीघ्र  १०००० या ज्यादा प्रतिमाह कमाने लगे. भविष्य में पञ्चगव्य के अन्य अनेक उत्पाद प्रचारकों को उपलब्ध कराये जाएगे. आप थोडा सा प्रयास करें तो - गोवंश की रक्षा होने लगेगी. 

            अग्रिम धन्यवाद , सबका मंगल हो सभी मानव स्वस्थ+ शाकाहारी हों! सभी जीवों की रक्षा हो!

भवदीय

कृते सर्वोदय विचार परिषद्

 

कृष्ण कुमार सिंघानिया/खुशालचंद आर्य/सुदर्शन ढंढारिया / मनमोहन गारोडिया /जगदीश बेडिया/भूपेश शर्मा

 विभाकर शाह /अशोक मसकरा/शिव कुमारजी चौधरी/दिनेश चौधरी/ सुषमा चक्रवर्ती/सुमन/सुनील द्विवेदी 

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शिक्षा व्यवस्था सुधार से बेरोजगारी की समस्या का स्थायी समाधान

 

अंग्रेजो को भारत को गुलाम बनाये रखने के लिये कुछ  आग्याकारी भारतीयो की आवश्यकता थी. सारे भारत के शासन का, सारा काम अंग्रेज नही कर सकते थे. अतः उन्होने ऐसी शिक्षा पद्धती का विकास किया जिससे उनको शासन चलाने  के लिये नौकर,क्लर्क, कलेक्टर, अफसर मिल सके. शिक्षा पद्धती आज भी वही काम कर रही है - नौकर बना रही है. वर्तमान शिक्षा पद्धती मे पढा लिखा लडका या लडकी अधिकांशतः नौकरी करना ही पसंद करते है.

 

नौकरी के लिये २-४ या १०-२० स्थान खाली है तो आवेदन आते है  १० या १०० गुणा. नौकरी तो मिलेगी केवल कुछ  को, बाकी अधिकांश बेरोजगार युवको को या तो आतंकवादी, माओवादी, नक्सलवादी नौकरी दे देते है या फिर ये अपराध के अंधेरी दुनिया मे अपने को बरबाद कर देश  के लिये नुक्सानदेह साबित होते है.

 

इस समस्या का समाधान है - भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धती, यानी गोकुळ गुरुकुल स्वावलंबी शिक्षा व्यवस्था जो राजा और रंक दोनो के बेटो को समान शिक्षित होणे का अवसर दे. जो स्वावलंबी बनाये, नौकर नही. ऐसा ही एक गुरुकुल है जो उडीसा के रौर्केला मे आचार्य संजय पांडा चला रहे है. इसके अनेक शाखाये है. यह कोयले से हिरा बनाया जाता है. अर्थार्त युवको को देश के लिये अपने लिये एवं अपने गांव के लिये अनमोल धरोहर बनाया जाता है. वह नौकरी करने के स्थान पर अनेक लोगो को रोजगार देने की क्षमता रखने लगता है. यहा क्षात्रो को वैज्ञानिक एवं आधुनिक ढंग से कृषी एवं गौद्योग संचालन गोशाला या फार्म हाउस (मेनेजमेंट) प्रावधान की शिक्षा दि जाती है. रुची एवम प्रतिभा के अनुसार क्षात्र के स्वाभाविक गुणो का विकास करके उसे समाज के लिये संपत्ती साबित होने का मार्गदर्शन दिया जाता है. रौर्केला से लगभग ८० किलोमीटर दूर एक स्थान पर बडा गुरुकुल चालता है. जहा १००० क्षात्रो को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था निर्माणाधीन है. १०० क्षात्रो के लिये निवास की सुविधा बन चुकी है.

 

इस अनमोल शिक्षा पद्धती का कोई शुल्क नही लिया जाता है. समर्थ माता पिता अपने बच्चे के लिये राशन आदि दे सकते है. गरीब बच्चो से वह भी नही लिया जाता.  

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 उर्जा का अक्षय स्त्रोत - गोबर गैस

            किसी ज़माने में ट्रंककाल बुक करके बात की जाती थी. भारी-भारी घुमाने वाले फोने थे. अब हल्के-हल्के मोबाइल आ गए है. नेट के जरिये चेहरा देख कर बात कर सकते है. किसी ज़माने में भारी भारी कैमरा थे. फिर आये रील वाले कैमरा आये. अब डिजिटल कैमरा आ  गए तो पुराने कैमरा अलमारी में बंद पड़े रहते है. किसी ज़माने में सभी रेल गाड़िया कोयले के इंजन से चलती थी. उसकी जगह ली डीज़ल इंजन ने एवं अब डीज़ल इंजन भी अब शंटिंग के काम आता है- बिजली का इंजन ही ज्यादातर रेल गाड़िया चलाता है. किन्तु बिजली का इंजन भी आगामी कुछ सालो में म्युजियम में देखने को मिलेगा. उसका स्थान लेने वाला है गोबर गैस से चलने वाला इंजन. स्वीडन में गोबर गैस से चलने वाला इंजन ३०० किलो मीटर की स्पीड से रेल गाड़ी को चलाता है. बेंकोक में प्राकृतिक गैस से टेम्पू चलते है. दिल्ली आदि कुछ शहरों में बसे एवं टेम्पू,कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) से चल रहे है. कानपूर एवं जयपुर गोशाला की मारुती गाड़ी/वैन भी गोबर गैस से चल रही है. 

            अमरिका के राष्ट्रपती ने भी माना की डीज़ल, पेट्रोल, कोयला आदि सब ख़त्म होने वाला है. उर्जा का अक्षय श्रोत तो है गाय का गोबर. कैलिफोर्निया, आस्ट्रेलिया आदि अनेक स्थानों में गोबर से बिजली बन रही है. महान वैज्ञानिक एवं दिल्ली विश्व विद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर मदन मोहन बजाज एवं युग द्रष्टा महापुरुष है. उनका मानना है कि बहुत शीघ्र  ही वह ज़माना आएगा जब सारे हवाई जहाज़ भी इसी गोबर गैस से चलेगे. भविष्य में अधिकांश परिवहन एवं बिजली उत्पादन गोबर गैस से होने वाला है. ऐसा डॉ बजाज का मानना है. इस गैस  के प्रयोग से सबसे कम प्रदुषण होता है. इसीलिए इसे "ग्रीन फियुल" अर्थात "हरा इंधन" भी कहते है. कहावत है - "गाय घास फूस खा कर अमृत जैसा दूध देती है-जो मनुष्य के शिशुकाल के जीवन का प्रमुख आधार है". किन्तु अब कहावत बदलने वाली है - कि "गाय घास फूस खाकर गोबर जैसा अनमोल खज़ाना देती है-जिससे सारी दुनिया चलती है और सारी दुनिया रोशन होती है". इस प्रकार गाय के अध्यात्मिक, आत्मिक, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य, खेती, संबंधी महत्व से कही अधिक महत्वपूर्ण बन जाएगी. उसका आर्थिक पक्ष; फिर भारत में भी गायो की सेवा विदेशी की तरह होने लगेगी. 

गोवंश के इसी आर्थिक पक्ष को उजागर करने सर्वोदय विचार परिषद् के कुछ युवा समाज सेवी हर शनिवार बैठक करते है एवं जन-जन तक गाय के इन महत्व  को कैसे पहुचाये इसकी चर्चा करते है. 

स्वतंत्रता के बाद के गत ६०-६२ सालो में हम लोगो ने ९०% गोवंश का नाश कर दिया है. गोवंश का नाश सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की  हत्या के समान मुर्खता पूर्ण कदम है जो भारत सरकार नए नए कत्लखाने खोल कर एवं मांस निर्यात को बढावा देकर उठा रही है. गोवंश की अनेक प्रजाति विलुप्त हो चुकी है. अनेक विलुप्ति के कगार पर है. जैसे शेर हिरण के संरक्षण पर सरकार कड़ोर खर्च करती है वैसे गोवंश के संरक्षण पर उसे खर्च करना चाहिए क्योंकि गाय सबसे उपयोगी है. हमारे अस्तित्व  के लिए आवश्यक है. भविष्य की उर्जा का अक्षय श्रोत है.

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गोमाता का वरदान स्वरुप "गोबर" से देह शुद्धि

 

हम लोग, आजकल जो आहार लेते है, जल पीते हैं,साँस लेते हैं, उस अन्न, पानी, हवा में प्रदुषण कितना बढ़ गया है, यह हम सब जानते हैं. रासायनिक उर्वरकों,जहरीले कीट नाशकों , कृत्रिम रंगों आदि के कारण अन्न, फल, सब्जी प्रदूषित हो गए हैं, सारे नालो,कारखानों, कत्लखानो का गन्दा पानी नदी में या भूमि में जाता है - फल स्वरुप पानी प्रदूषित हो गया है. जीव हत्या जनित पीड़ा तरंगो, ट्रक, ट्रैक्टर, गाड़ियों,आदि वाहनों के धुएं से हवा दूषित हो गयी है. जैविक = प्राकृतिक गोबर की खाद से उत्पन्न पौष्टिक, शुद्ध अन्न - फल - सब्जी या तो पहुँच के बहार है या हमें महत्त्व पता नहीं अर्थात हम जागरूक नहीं या हम प्राप्त करने का प्रयास नहीं करते. पानी और हवा के प्रति तो हम और ज्यादा लापरवाह हैं. इस प्रकार हमारे शरीर रूपी पिंड में और पूरी पृथ्वी रूपी ब्रह्माण्ड में प्रदूषित कणों के भंडार बढ़ने लगें हैं. मानव शरीर में होने वाले लगभग सभी रोग इन्ही कारणों से होते है.

 

प्रदूषण को निकलने का बहुत सरल उपाय है - गोबर स्नान. गोबर लेपन. गोबर सबसे ज्यादा शुद्धि कारक ( एंटी ओक्सिडेंट ) होता है. आज भी गाँव में घरों या चूल्हे को या यज्ञ स्थल को गोबर से लीप कर शुद्ध किया जाता है. सारे शरीर में गोबर लगा कर थोड़ी देर धुप में उसे सुखा कर स्नान करने से बहुत से जहरीले तत्व, शरीर से निकल जाते हैं. उससे भी श्रेष्ठ उपाय है आप लेट जाएँ, और गोबर की मोटी परत से शरीर को ढक दिया जाये; आधा या एक घंटा इसी प्रकार लेटे रहें, इससे शरीर का सारा जहर ( टोक्सिन) गोबर सोख लेगा. एवं आपकी देह शुद्ध हो जाएगी. ध्यान रहे गोबर देशी गोवंश का ही होना चाहिए. ऐसी सुविधा किसी गोशाला में संभव है जहाँ केवल देशी गोवंश ही हो. महीने में एक बार इस प्रकार देह शुद्धि करने से आपकी अनमोल देह ज्यादा स्वस्थ रहेगी,ज्यादा तनाव रहित रहेगी, साथ ही दीर्घायु होगी. 

 

यह सुविधा राउरकेला की शोधन - गोकुल गुरुकुल में उपलब्ध है.

इच्छुक व्यक्ति संपर्क करे : आचार्य संजय पंडा - ९४३७५८०५८९,९८५३३४७५८७

 

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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर''

Writer & Editor & Published Hindi Monthly "JYOTISHNIKETAN SANDESH"

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