जब चोर ही चौकीदार हो जायें तो चोरी पकड़ने के नए नए तरीके अपने आप इजाद होने लगते हैं॥
जब
से हमारी प्रिय नेता सोनिया जी को गरीबो की चिंता सताने लगी है और
उन्होंने देश में से गरीबी का समूल नाश करने का अहद किया है तभी से हमारे
गहलोत जी ने गरीबों में अमीरों की घुसपैठ रोकने का एक नायाब तरीका ढूंढ
निकाला है ता की गरीबों का राशन अमीर लोग न चट कर जाएं । गहलोत जी के कान
में किसी बाबु ने एक राज़ की बात डाल दी कि ४० % अमीर लोग बी .पी.एल में घुसपैठ कर गए हैं जो सोनिया जी की दरिया दिली का फायदा उठा कर सस्ते दामों ३५ किलो अनाज लूट
ले जाते हैं। गहलोत जी ने फरमान जारी कर दिया कि हर बी.पी. एल. के माथे
पर लिख दिया जाए कि यह गरीब है। बाबु लोगों ने एक नई तरकीब इजाद की कि
बी.पी.एल का फायदा उठाने वाले परिवारों के दरवाजे पर 'बी.पी .एल का साईन
बोर्ड ' चस्पा कर दिया जाये ताकि सब को पता चल जाये की ये बेचारे गरीबों
में से गरीब हैं और जो लोग गरीब नहीं उन की सूचना 'बाबू ' लोगों को दी
जाये ताकि उनका नाम काट कर सच मुच गरीब को राशन दिया जाये और फिर नाजायज
फायदा लेने वालों को थोड़ी शर्म भी आयेगी।
इंदिरा जी ने गरीब की रेखा तो उस समय ही निर्धारित कर डाली थी ,जब उन्होंने गरीबी हटाने का अहद किया था . ६ रोटी, एक कटोरी दाल-
सब्जी दो वक्त खाने वाला गरीबी रेखा से ऊपर गिना जायेगा। अब परांठे और
तरकारिया खाने वाले भी पीले कार्ड उठाये फिरते हैं ,यह तो सरा सर धोखा
हुआ न गहलोत सरकार के साथ !
हमारे आटा मंत्री ..अरे वो ही मराठा मानुष
शरद पवार जी यों ही बौखलाए हुए हैं कहीं चीनी के साथ साथ गेहूं की भई
किल्लत न हो जाये ...बोले हर साल ५८,००० करोड़ का अनाज तो वैसे ही गल सड
जाता है । कोई इन महाशय से पूछे कि इतना अनाज अकेले चूहे तो खा नहीं सकते
और न ही चोर- उच्चकों के बस कि बात है कि इतना अनाज उड़ा ले जाए । यह तो
एम्.सी.बी. या फिर एम्.सी .एल.का काम लगता है अब आप पूछेंगे कि भई यह क्या
बला है ,तो सुनिए यह है अई.पी.एल कि तर्ज़ पर' मोस्ट करप्ट बाबू 'और 'मोस्ट
करप्ट लीडर ' अब हमारे गरीब देश की सेहत के कर्णधार 'बाबू' केतन देसाई २
करोड़ की रिश्वत का जुगाड़ करते पकडे गए । सी बी आई ने उनके महल नुमा घर
को खंगाला तो डेढ़ टन सोना मिला जो महज़ १८०० करोड़ का है। ऐसे ही हमारी
हाथी मेरे साथी वाली बहिन जी ने मात्र हलफनामे में ज़िक्र कर दिया की अब वे
८८ करोड़ी दलित नेता हैं और तीन साल पहले ५२ करोड़ी थी । हमारी दलित नेता
के पास हर साल एक करोड़ कहाँ से आ जाता है। इनका तो पता भी पांच साल के
बाद चलता है जब चुनाव के फार्म के साथ अपनी लूट का कुछ कुछ खुलासा इन्हें
करना ही पड़ता है। अब गहलोत जी के इन बाबू लोगों से कोई पूछे ! है कोई माई
का लाल ! जो इन के महलों पर' चोर चोर मौसेरे भाई' का साईन बोर्ड चस्पा कर
दे। बड़े बड़े उद्योगपति बैंकों का एक लाख करोड़ रूपया हडपे बैठे हैं !
है कोई इन्हें पूछने वाला ?
चाणक्य ने ठीक ही कहा है जिस राजा के मंत्री महलों में रहते हैं -उसकी जनता झोंपड़ों में रहती है।
जिस
रफ़्तार से इस हमारे देश में 'केतन-माया-लालू और क्वात्रोचिओं ' की गिनती
बढ़ रही है उसी रफ्तार से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की
संख्या में इजाफा हो रहा है। देश की ७०% जनता २०/- प्रति दिन में गुजर बसर
करने को मजबूर है। २०/- रूपए में तो अब दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी
नामुमकिन सा लगता है। और इंसान के जीने के लिए कपडा,मकान,दवाई ,यातायात
,शादी-विवाह के लिए भी पैसे की दरकार है। और हाँ अंतिम संस्कार के लिए
तो..............
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