acharya

मैं आपसे पूछता हूं............आखिर राहुल और सोनिया गांधी का दोष क्या है.............?

बडे लंबे समय से इस बात पर बहस चल रही है कि गांधी परिवार के लोगों ने देश को नरक से भी बुरी स्थिति में लाकर खडा कर दिया है...............मैं आपसे पूछता हूं कि यदि ऐसा ही कि आजादी के बाद से भारत की अवनति के लिए नेहरू और गांधी परिवार जिम्मेदार है तो क्यों हम उन्हे सरकार बनाने का मौका देते आएं है...........क्यों आखिर इंडिया शायनिंग की चमक दमक केबाद भी विपक्ष बौना साबित हो गया............अगर राहुल या सोनिया का दोष इतना ही कि उसने इस देश में गांधी परिवार में जन्म लिया और सोनिया अपना सब कुछ छोडकर इस देश की होकर रह गई..........तो क्या हम खुद संकीर्ण मानसिकता और किसी कुंठित बीमारी से नहीं ग्रसित है.............मैं आपसे पूछता हूं इलाज की जरूरत किसे हैं देश को या खुद हमारी सोच.................मैं आपसे पूछता हूं क्या सिर्फ कांग्रेस ही जिम्मेदार है...........

Tags: .आजादी, आचार्य, केशव, गांधी, देश, राहुल, सोनिया

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Dear Rajinder Ji,

Your compliments are real eye opening. I was not fully aware that she tried her best to become PM. I vaguely knew that she didn't want to be actively involved in politics. It is the assassination of Lt PM Rajiv Ji she felt within to contribute to the Congress specifically and to the country by large. Common people learnt that she made sacrifice by not becoming PM, herself.

Thanking you.
Joseph

Rajinder Katoch said:
Dear Joseph, It was not in the hands of Sonia Gandhi to become Prime Minister because in every country there are less talked people who generally remain behind the country stopped Sonia Gandhi from becoming PM. She tried her best and approached the then President Shri Abul Kalam who showed her the real face. When you want a special status for someone just because she is a christian, you first allow others and give them equal status in christian dominated countries. You are a christian and I can understand your pain. You want a Roman Catholic to be country's PM. A RC can become India's PM or a minister if he or she is born here. She will never become PM and that is why MMS was brought in. Yes, Rahul Gandhi can become PM. She applied for Indian citizenship after the death of Rajiv Gandhi and all these years. Her love for India is known to all and thus she never applied for Indian citizenship. Today, I see her in different perspective. She is settled in India and now she is very much an Indian citizen. But, no one should sit on higher government post till the time she or he is citizen by birth. Follow the same principle you maintain in other European countries.

Joseph Herman Minj said:
Bhai Acharya Ji,
Sabka apna apna najariya hai. Kuch longon ko negative hi najar aata hai, to hum kya karen. Bahut kam hote hain jo sab cheej mein positive dekne ka prayatna karte hain.
Gandhi pariwar bhi Manav hi hain. Ho sakta hai kuch bhul chuk ho gayi ho. Par aisa lagta hai ki unki bhul chuk unke Tyag aur Samarpan ke samne naganya hai.
Soniya ji ko hi le lijiye, Agar wo chahti Prime Minister bane to Kaun rok sakta tha. Use Videshi kah kah kar kitna jaleel kiya. Parantu Soniya ji ne kisi ko gaali nahi di. Usne Tyag ka mishal kayam karte hu Manmohan ji ko bagdor thama di. Khud Manmohan ji ne bhi sapne mein nahi shochi thi ki wo ek din PM ban jayenge. Wo to gandhi Pariwar ke khun se jude hue nahi hai. Soniya ji ke tyag ke samne sabhi alochko ke Muh band ho gaye.
Hum sabon ko ek jaisa sochne ke liye majboor bhi nahi kar sakte. Han hume apni tika tipni se pahle soch lena chahiye ki hum kya kah rahe hai.
- Joseph
आचार्य जी,
आप दीपा जी की टीप्पणी से नाराज़ क्यों होते हैं
आप ने एक बहस शुरू की वह कबीले तारीफ हा
यह तो एक विषय हा
उसे वयक्टीगत क्यों लेते हैं
मेरी आप से गुज़ारिश है की आप अलविदा ना कहें
हम सब भारतीय हैं एक दूसरे की सुनना सीखें
एक दूसरे को झेलना भी सीखें. आशा है आप मेरे निवेदन स्वीकार करेंगे. जी ध्न्यवाद.
- जोसेफ


acharya said:
जी दीपा जी मैं आपकी इस बात से बेहद दुखी हूं कि आपने मुझे तलुए चाटने की शिक्षा दे रही है.........यह बात साबित करती है कि अब इस फोरम में बोद्धिकता की बात तो दूर समझ भी परे रख दी गई है.........व्यक्तिगत बातें से परे मैं इस साइट को अलविदा कह रहा हूं........आप लोगों से जो चर्चा हुई मेरी लिए अविस्मरणीय के साथ साथ सीखने के लिए बहुत कुछ दे गई ............अलविदा दोस्तों

deepa biswas said:
YHA PAHLE TALUE CHATANA SHEEKHE???

acharya said:
जी ये तो कोई बात नहीं अमित बाबू पहले राजनीति में बहस करना सीख के आओ
Amit Srivastava said:
acharya, did you get something from congress to defend Sonia and Rahul? please enlighten us.
itni facility our power mile to mai pakistaan yaa talibaan jaane ke liye taiyaar hu..................AGER UNKE SATH 1 SENTENCE JO GAANDHI PARIWAAR SE RISTE KO NAZARANDAAZ KAR DE TO DUSRI KOI KARAAN BATAAYE PRADHANMANTRI YA RAASTPATI KOI BHI HO , POWER UNKE HAATH ME KYU RAHTA HAI SIR JARA BATAAIYE PLEASE MERA GUIDELINE KIJIYE AGER MAI BHATAK GAYA HU TAAKI MULK KE AUR LOGO TAK MAI AAPKI BAAT PAHUCHA SAKU ..............................
JAY BHARAT..........................BACHAAO BHARAT...............................................
आचार्या जी,
आप रहल सोनिया जी के हाथो देश हित मे हुए एक-दो कार्यो को गिना दे फिर जितना गुणगान करते रहे ,आज गाँधी के नाम पर देश मे चापलूसो की फोज खड़ी हो रही है कही आप भी तो उसी आँधी बहरी और गूगी फ़ौज के संतरी मंत्री तो नही वन गये है मेरा देश लूट रहा है और आप राहुल रूपी बंदर के मदारी वनके पत्रीकरिता के वाजार मे खड़े होकर मजमा लगये हो औ की आम जनता को तमासे मे भारत के विन्स लीला दिखाने को लालायित हो
Etane chatukaar log hain ki janta ko ye batane ki koshis mein hain ki Nehru aur Gandhi Family kabhi Galat aur dosi ho hi nahi Sakti. Have a great read here:

Can prime ministers hailing from the Nehru family ever be wrong, asks Virendra Kapoor.

Believe it or not, prime ministers from the Nehru-Gandhi family did no wrong, infallible as all three were.

If there were mistakes, nay, Himalayan blunders, these were the handiwork of lesser mortals, not of super human beings belonging to India's [ Images ] First Family.

Constraints of space do not allow one to catalogue all that went wrong during the time Jawaharlal Nehru [ Images ] was prime minister. Suffice it to say, the man guilty for the bloody nose the Chinese gave India was not Nehru. No, how could it be him? No way.

It was then defence minister V K Krishna Menon. However, if the defence forces did anything good, such as 'liberating' tiny Goa [ Images ] on the eve of the 1962 general election, the credit solely belonged to Nehru and Nehru alone.

Of course, it was not Nehru who internationalised the Kashmir [ Images ] dispute by rushing to the United Nations. Why? Simple, being a Nehru, he could do not wrong.

Now come to a huge black mark during the reign of Prime Minister Indira Gandhi [ Images ]. Of course, she was happy to be Atal Bihari Vajpayee's [ Images ] Durga when our valiant soldiers helped liberate Bangladesh. But if a few months later Bangladesh became an Islamic republic, it wasn't her fault, was it?

Mind you, snuffing out of democracy from the land for 19 months was certainly not her decision. The Emergency was the handiwork of her minions. So were those horrible excesses committed during that dark period. Corrupt bureaucrats and policemen were clearly at fault while Indira Gandhi was completely innocent. And her younger son, Sanjay, well, he was the epitome of good political behaviour all along.

As for Rajiv Gandhi [ Images ], dearest to the current bosses of the Congress party, one seeks the reader's indulgence, especially because one has to acknowledge the sterling contribution of one of his most enlightened followers, Arjun Singh [ Images ], as well.

Hats off to Singh. Age might have taken a toll physically, but mentally he continues to be as crafty, as devious as at anytime before.
More on: - http://news.rediff.com/column/2010/aug/16/column-virendra-kapoor-as...

So, now it is clear that why such mental slaves defending this family business!
APNE SHAI KHA HE..AUR EK DAM SHAHI WORD USE KIYA HE..
YHE TO LADKIO (GIRLS ATTITUDE)
WALE NAKHRE HE "AL VIDA DOSTO ME JA RAHA HU"


Kavi Hardayal Kushwaha said:
आचार्या जी,
आप रहल सोनिया जी के हाथो देश हित मे हुए एक-दो कार्यो को गिना दे फिर जितना गुणगान करते रहे ,आज गाँधी के नाम पर देश मे चापलूसो की फोज खड़ी हो रही है कही आप भी तो उसी आँधी बहरी और गूगी फ़ौज के संतरी मंत्री तो नही वन गये है मेरा देश लूट रहा है और आप राहुल रूपी बंदर के मदारी वनके पत्रीकरिता के वाजार मे खड़े होकर मजमा लगये हो औ की आम जनता को तमासे मे भारत के विन्स लीला दिखाने को लालायित हो
मैने सब लोगो की बातें सुनी और लौटने का मन नहीं होने केबाद भी लगातार आमंत्रण और आप लोगों के प्यार को नहीं ठकुरा पाया..........
मैं उन सारे सवालों के जबाब देने की कोशिश कर रहा हूं जो य़हां पर खडे़ किये गये हैं..............

बंधु... समझ नहीं पा रहा हूं कि राहुल को लेकर आपके मन में गुस्सा ज्यादा है या घृणा। आपने एक सवाल के जवाब में कई अप्रासंगिक सवाल भी साथ में खड़े कर दिए हैं। इनमें कई ऐसे जिन पर अभी चर्चा की तो विषयांतर हो जाएगा...
बहरहाल आपकी लाइनें आपकी सामंती सोच को बेनकाब कर चुकी हैं... अगर किसी के खानदान में खराबी हो... वहां सच-झूठ का घालमेल हो तब भी उस कुनबे में जन्म लेने वालों को उसकी सजा दी जाए... यानी यह तो वही हुआ न कि चांडाल के घर में अगर वाल्मीकि भी जन्मे तो उसके कानों में शंबूक की तरह पिघलता हुआ शीशा डाल दिया जाए...
अब मूल बात कि राहुल कौन और उसकी योग्यता (आपके शब्दों में अनुभव) क्या और मीडिया को फोकस वहीं क्यों.... तो बंधु राहुल वह व्यक्ति है जिसने अपनी घुट्टी में देश संबंधित फैसलों को पिया है... चाहे वह पहले परमाणु धमाके हों या 71 की जंग या फिर ग्लोबलाइजेशन या पिता और दादी की शहादत... अगर वह बेसब्र होते तो शायद मनमोहन की जगह पीएम हो सकते थे... लेकिन आपको याद दिलाऊं कि उन्होंने कोई भी पद लेने की बजाए संगठन को सुधारना और देश को समझने के लिए सर्वोच्च शिखरों से ले कर दलितों की देहरी तक का सफर जारी रखा है... यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि उनका इंटलेक्चुअल विंग और देश-दुनिया के बड़े फैसलों पर एनालिसिलस से अवगत कराता है, और वह खुद इस काम में शामिल होते हैं। अब जरा आप सोच कर बताएं कि इतने गहरे अनुभव वाले इतने किस युवा को आप जानते हैं.... रहा सवाल मीडिया का तो जहां गुड होगा वही.... आप कम समझदार नहीं है पीआर वाले ज्यादा बेहतर जानते हैं कि संभावना कहां है ट्रेन और पालीथीन को हल्के में मत ले लेना दरअसल यह स्टेटमेंट है कि कोई तो है जो हथेली पर शिखर रखा होने के बाद भी धरा की बात कर सकता है...
आप चाहेंगे तो तथ्यों के साथ भी चर्चा जारी रहेगी....
रही बात सुमंत तुम्हारे सवाल की राहुल गांधी की योग्यता क्या है तो ये पढ़ लेना....खास कर मैने इसमें उस बात का जिक्र किया जिसमें सवाल पूछने पर कानूनू नोटिस दिया गया था उस नोटिस की प्रतिक्रिया दी हुई......



राहुल गांधी

________________________________________
सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव

पदस्थ

कार्यभार ग्रहण 2004
पूर्व अधिकारी सोनिया गांधी

निर्वाचन क्षेत्र अमेठी , उत्तर प्रदेश

________________________________________
जन्म 19 जून 1970
नयी दिल्ली, भारत

राजनैतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

आवास नयी दिल्ली

विद्या अर्जन
धर्म
हस्ताक्षर रोलिंस कॉलेज (बी.ए.)
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (एम.फिल.)
हिन्दु
राहुल गांधी के हस्ताक्षर

राहुल गांधी (जन्म: 19 जून 1970) एक भारतीय नेता और भारत की संसद के सदस्य हैं, और भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा में उत्तर प्रदेश में स्थित अमेठी चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.राहुल गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबद्ध हैं.राहुल उस नेहरू-गांधी परिवार से हैं, जो भारत का सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवार है. राहुल को 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस को मिली बड़ी जीत का श्रेय दिया गया है. उनकी राजनैतिक रणनीतियों में जमीनी स्तर की सक्रियता को बल देना, ग्रामीण भारत के साथ गहरे संबंध स्थापित करना और कांग्रेस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने की कोशिश करना, प्रमुख हैंअनुभवहीनता के चलते राहुल नें मनमोहन सिंह की सरकार में मन्त्रीपद लेने से इंकार किया है. आजकल राहुल अपना सारा ध्यान राजनीतिक अनुभव प्राप्त करने और पार्टी को जड़ से मजबूत बनाने पर केंद्रित कर रहे हैं.
प्रारंभिक जीवन
राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को नयी दिल्ली में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और वर्तमान काँग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी के यहां हुआ था. वह अपने माता पिता की दो संतानों में बड़े हैं और प्रियंका गांधी वढेरा के बड़े भाई हैं. राहुल की दादी भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं.
राहुल की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के मॉडर्न स्कूल में हुई थी, इसके बाद वो प्रसिद्ध दून स्कूल में पढ़ने चले गये जहां उनके पिता ने भी विद्यार्जन किया था. सन 1981-83 तक सुरक्षा कारणों के कारण राहुल को अपनी पढ़ाई घर से ही करनी पड़ी. राहुल ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के रोलिंस कॉलेज फ्लोरिडा से सन 1994 में अपनी कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की, इसके बाद सन 1995 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से एम.फिल. की उपाधि प्राप्त की.
कैरियर (व्यवसाय)
शुरूआती कैरियर
स्नातक की पढ़ाई के बाद राहुल ने प्रबंधन गुरु माइकल पोर्टर की प्रबंधन परामर्श कंपनी मॉनीटर ग्रुप के साथ 3 साल तक काम किया. इस दौरान उनकी कंपनी और सहकर्मी इस बात से पूरी तरह से अनभिज्ञ थे कि वो किसके साथ काम कर रहे हैं क्योंकि राहुल यहां एक छद्म नाम ‘’रॉल विंसी’’ के नाम से कार्य करते थे. सन 2002 के अंत में वो मुंबई में अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी से संबंधित एक आउटसोर्सिंग कंपनी के चलाने के लिए भारत लौट आये.
राजनीतिक कैरियर
2003 में, राहुल गांधी के राष्ट्रीय राजनीति में आसन्न प्रविष्टि के बारे में बड़े पैमाने पर मीडिया की अटकलबाजी थी, जिसकी उन्होंने पुष्टि नहीं की.वह सार्वजनिक समारोहों और कांग्रेस की बैठकों में अपनी माँ के साथ दिखाई दिए.एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट श्रृंखला देखने के लिए एक सद्भावना यात्रा पर अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ पाकिस्तान भी गए.
जनवरी 2004 में राजनीति उनके और उनकी बहन के संभावित प्रवेश के बारे में अटकलें बढ़ीं जब उन्होंने अपने पिता के पूर्व निर्वाचन क्षेत्र अमेठी का दौरा किया, जो उस समय उनकी माँ के नेतृत्व में था.उन्होंने एक निश्चित प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया था, यह कहकर की "मैं राजनीति के विरुद्ध नहीं हूँ. मैंने यह तय नहीं किया है की मैं राजनीति में कब प्रवेश करूँगा और वास्तव में, करूँगा भी कि नहीं."

मार्च 2004 में, मई 2004 का चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ उन्होंने राजनीति में अपने प्रवेश की घोषणा की, जिसमें वे अपने पिता के पूर्व निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश के अमेठी से लोकसभा के लिए खड़े हुए, जो भारत की संसद का निचला सदन है. इससे पहले, उनके चाचा संजय ने, एक विमान दुर्घटना से पहले, इस कुर्सी का नेतृत्व किया.यह कुर्सी उनकी माँ के नेतृत्व में थी जब तक वह पड़ोसी कुर्सी राए बरेली में स्थानान्तरित नहीं हुई थी.उस समय राज्य की 80 /10 लोकसभा सीटों को जीतकर, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का बुरा हाल था. उस समय, इस कदम ने राजनीतिक टीकाकारों में आश्चर्य उत्पन्न किया, जिन्होंने उनकी बहन प्रियंका में अधिक करिश्माई और सफल होने की संभावना देखी.पार्टी के अधिकारियों के पास मीडिया के लिए CV तैयार नहीं था, उनका कदम इतना आश्चर्य जनक था.इसने अटकलें उत्पन्न की कि भारत के सबसे मशहूर राजनीतिक परिवार के एक युवा सदस्य की उपस्थिति भारत की युवा आबादी के बीच में कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक भाग्य को पुनर्जीवित करेगीविदेशी मीडिया के साथ अपने पहले इंटरव्यू में, उन्होंने देश को जोड़ने वाले शख्सियत के रूप में स्वयं को पेश किया और भारत की "विभाजनकारी" राजनीति की निंदा की, यह कहकर कि वह जाति और धार्मिक तनाव को कम करने की कोशिश करेंगे. उनकी उम्मीदवारी को स्थानीयों ने उत्साह के साथ स्वागत किया, जिनका इस क्षेत्र में इस परिवार की उपस्थिति के साथ एक लंबा संबंध था. , भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतावह एक विशाल बहुमत से जीते, 1,00,000 की एक मार्जिन के साथ परिवार का गढ़ बनाए रखा, जब कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को अप्रत्याशित रूप से हराया. उनका अभियान उनकी छोटी बहन, प्रियंका गांधी वाद्रा द्वारा संचालित किया गया था. 2006 तक उन्होंने कोई अन्य पद ग्रहण नहीं किया और मुख्य निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों और उत्तर प्रदेश की राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया, और भारतीय और अंतरराष्ट्रीय प्रेस में व्यापक रूप से अटकलें थी की सोनिया गांधी भविष्य में उन्हें एक राष्ट्रीय स्तर का कांग्रेस नेता बनाने के लिए तैयार कर रही हैं.

जनवरी 2006 में, हैदराबाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक सम्मेलन में, पार्टी के हजारों सदस्यों ने गांधी को पार्टी में एक और महत्वपूर्ण नेतृत्व की भूमिका के लिए प्रोत्साहित किया और प्रतिनिधियों के संबोधन की मांग की.उन्होंने कहा, मैं इसकी सराहना करता हूँ और मैं आपकी भावनाओं और समर्थन के लिए आभारी हूँ.मैं आपको विश्वास दिलाता की मैं आपको निराश नहीं करूँगा", लेकिन धैर्य रखने को कहा और तुरंत एक उच्च स्तर भूमिका निभाने से मना कर दिया.

गांधी और उनकी बहन ने 2006 में राय बरेली में पुनः सत्तारूढ़ होने के लिए उनकी माँ के अभियान को प्रबंधित किया, जो की आसानी से 400000 मतों से अधिक मार्जिन के साथ जीती थीं.

2007 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए एक उच्च स्तर के कांग्रेस अभियान में वह एक प्रमुख व्यक्ति थे; कांग्रेस ने, हलाँकि, 8.53% मतदान के साथ केवल 22 सीटें जीती.इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को, जो पिछड़ी जाति के भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती है, अपने ही अधिकार में उत्तर प्रदेश में 16 साल शासन करती हुई पहली पार्टी देखी.

राहुल गांधी को 24 सितंबर 2007 में पार्टी सचिवालय के एक फेरबदल में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का महासचिव नियुक्त किया गया था. उसी फेरबदल में, उन्हें युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ का निरिक्षण दिया गया था.

एक युवा नेता के रूप में खुद को साबित करने के उनके प्रयास में नवम्बर 2008 में उन्होंने नई दिल्ली में अपने 12, तुघ्लक लेन निवास में कम से कम 40 लोगों को सूक्षमता से चुनने के लिए साक्षात्कार आयोजित किया, जो की भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) की सोच-टैंक बनेंगे, जबसे वह सितम्बर 2007 में महासचिव नियुक्त हुए हैं तबसे इस संगठन को परिणत करने के इच्छुक हैं.

2009 चुनाव
2009 के लोकसभा चुनावों में, उन्होंने उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 3,33,000 वोटों क अन्तर् से पराजित करके अपना अमेठी निर्वाचक क्षेत्र बनाए रखा.इन चुनावों में कांग्रेस ने कुल 80 लोकसभा सीटों में से 21 जीतकर उत्तर प्रदेश में खुद को पुनर्जीवित किया और इस बदलाव का श्रेय राहुल गांधी को दिया गया है. छह सप्ताह में देश भर में उन्होंने 125 रैलियों में भाषण दिया था.
पार्टी वृत्त में वह RG के रूप में जाने जाते हैं.

आलोचना
जब 2006 के आखिर में न्यूज़वीक ने इल्जाम लगाया की उन्होंने हार्वर्ड और कैंब्रिज में अपनी डिग्री पूरी नहीं की थी या मॉनिटर ग्रुप में काम नहीं किया था, तब राहुल गांधी के कानूनी मामलों की टीम ने जवाब में एक कानूनी नोटिस भेजा, जिसके बाद वे जल्दी से मुकर गए या पहले के बयानों का योग्य किया.

राहुल गांधी ने 1971 में पाकिस्तान के टूटने को, अपने परिवार की "सफलताओं" में गिना.इस बयान ने भारत में कई राजनीतिक दलों से साथ ही विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सहित पाकिस्तान के उल्लेखनीय लोगों से आलोचना को आमंत्रित किया.प्रसिद्ध इतिहासकार इरफान हबीब ने कहा की यह टिप्पणी "..बांग्लादेश आंदोलन का अपमान था.


2008 के आखिर में, राहुल गांधी के लिए एक स्पष्ट रोक से उनकी शक्ति का पता चला.गांधी को चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करने के लिए सभागार का उपयोग करने से रोका गया, मुख्यमंत्री सुश्री मायावती की राजनीतिक चालबाजियों के परिणामस्वरूप.बाद में, विश्वविद्यालय के कुलपति वी.के.सूरी को राज्यपाल श्री टी.वी.राजेश्वर (जो कुलाधिपति भी थे) द्वारा बाहर किया गया, जो गांधी परिवार के समर्थक और श्री सूरी के नियोक्ता थे.इस घटना को शिक्षा की राजनीति के साक्ष्य के रूप में उद्धृत किया गया और अजित निनान द्वारा टाइम्स ऑफ इंडिया में एक हास्यचित्र में लिखा गया: "वंश संबंधित प्रश्न का उत्तर राहुल जी के पैदल सैनिकों द्वारा दिया जा रहा है.

सेंट स्टीफेंस कॉलेज में उनका दाखिला विवादास्पद था क्योंकि एक प्रतिस्पर्धात्मक पिस्तौल निशानेबाज़ के रूप में उनकी क्षमताओं के आधार पर भर्ती किया गया था, जो विवादित था.उन्होंने शिक्षा के एक वर्ष के बाद 1990 में उस कॉलेज को छोड़ दिया था.
दूसरी चीज सुमंत तुमने और कितनों ने यह कहा कि राहुल की योग्यता क्या है तो ये जरूर देखना

http://www.youtube.com/watch?v=FbSOJ4gYdHE&feature=channel
तुम्हारा तीसरा सवाल सुंमत की राहुल के पास जायदाज कहां से आई.....इसका जबाब तुम्हारे कुतर्की तरीके से ही दे रहा हूं

देश में अमीरी बढे तो बुरा क्या है? अगर कोई शान-शौकत , विलासिता और मंहगे उपभोक्ता सामानों के साथ जीता है तो इसमे बुरा क्या है. उसके पास संसाधन है तो वो जी रहा है, आपके पास नही है तो ईर्श्या क्यों? आज मेरे पास मर्सिडीज नही है तो क्या मैं टाटा और अम्बानी को जिम्मेदार ठहराऊँ. मुझे याद आता है इमरजेंसी के दौर की फिल्में, जब एक रटा रटाया सवांद अमुमन हर फिल्म मे होता था - "सेठ तुम हमारे पसीने की खाते हो!" इन फिल्मो मे उद्योगपतियों को जी भर कर गालीयाँ दी जाती थी और यह भुला दिया जाता था उस कारखाने को खडा करने के लिए उस कथाकथित सेठ ने कितना पसीना बहाया है! क्या वो सिर्फ मौज कर रहा है? क्या सारे उद्योगपति सामंतवादी होते हैं? क्या आप गिन सकते हैं टाटा, अम्बानी,बिड्ला और बजाज के उपक्रमों कितने कर्मचारी कार्य करते हैं और कितने घरो के चुल्हे जलते हैं? गिन सकते हैं? क्या ये बन्द हो जाने चाहिए या और खुलने चाहिए? सोच लिजीए!
आप लोगों ने कई सवाल खडे किये उनमेंसे एक है कि आखिर कांग्रेस ने देश के लिए क्या किया............तो एक झलक इंदिरा जी से शुरू करते हैं

इस संदर्भ में पोखरन-1 का ज़िक्र ज़रूरी है क्योंकि 1974 का वो परमाणु परीक्षण उन्हीं की अगवाई में हुआ था. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उन्होंने अमिट छाप छोड़ी और 1983 में दिल्ली में हुए सातवें गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में ये साफ़ नज़र आया.

फ़िदेल कैस्ट्रो का उन्हें हल्के से गले लगाना और फिर उन्हें गुटनिरपेक्ष आंदोलन के अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी सौंपना एक ऐसा दृश्य था जो विश्व मंच पर तीसरी दुनिया के आगमन का प्रतीक था और इसके प्रभाव दूरगामी थे.
rahul se na to grina he aur nahi gussa...
ITNE BADE MAHAPURUSH KE HOTE
1..GHOTALE BAJ ITNA GHOTA GAMES KE NAM PAR KAR RAHE HE...
2.. DALITO KE GHAR JA RAHE HE? KIO JA RAHE HE?
3..6 SAL NIKAL DO INKI PARTY KA SASHAN CHAL RAHA HE...
KIO NAHI SUDHRAI DALITO KI SAMSAYA??
4.. GARIBO KI BAT KARNE SE PAHLE...AANJ JO SAD RAHA HE....ISKA एनालिसिलस KIYA KABHI..
5..KISAN LAKHO KI SANKHYA ME ATMHTYA KAR RAHE .ISKA एनालिसिलस KIYA KABHI..
6..PATA HE MEDIA KA CAMERA PICHE CHAL RAHA HE POLYTHENE UTHA LIYA..AGAR ITNIHI PARYAVARN KI
CHINTA HE TO BAN KIO NAHI KARTE...
JAHA TAK PM BAN NE KA SAWAL HE....PRESENT PM DUMMY HE
ASLI PM MADAM AUR UNKE SUPUTRA HI HE...
BINA INKI AGAYA KE CONGRESS ME EK PATTA BHI NAHI HIL SAKTA

acharya said:
मैने सब लोगो की बातें सुनी और लौटने का मन नहीं होने केबाद भी लगातार आमंत्रण और आप लोगों के प्यार को नहीं ठकुरा पाया..........
मैं उन सारे सवालों के जबाब देने की कोशिश कर रहा हूं जो य़हां पर खडे़ किये गये हैं..............

बंधु... समझ नहीं पा रहा हूं कि राहुल को लेकर आपके मन में गुस्सा ज्यादा है या घृणा। आपने एक सवाल के जवाब में कई अप्रासंगिक सवाल भी साथ में खड़े कर दिए हैं। इनमें कई ऐसे जिन पर अभी चर्चा की तो विषयांतर हो जाएगा...
बहरहाल आपकी लाइनें आपकी सामंती सोच को बेनकाब कर चुकी हैं... अगर किसी के खानदान में खराबी हो... वहां सच-झूठ का घालमेल हो तब भी उस कुनबे में जन्म लेने वालों को उसकी सजा दी जाए... यानी यह तो वही हुआ न कि चांडाल के घर में अगर वाल्मीकि भी जन्मे तो उसके कानों में शंबूक की तरह पिघलता हुआ शीशा डाल दिया जाए...
अब मूल बात कि राहुल कौन और उसकी योग्यता (आपके शब्दों में अनुभव) क्या और मीडिया को फोकस वहीं क्यों.... तो बंधु राहुल वह व्यक्ति है जिसने अपनी घुट्टी में देश संबंधित फैसलों को पिया है... चाहे वह पहले परमाणु धमाके हों या 71 की जंग या फिर ग्लोबलाइजेशन या पिता और दादी की शहादत... अगर वह बेसब्र होते तो शायद मनमोहन की जगह पीएम हो सकते थे... लेकिन आपको याद दिलाऊं कि उन्होंने कोई भी पद लेने की बजाए संगठन को सुधारना और देश को समझने के लिए सर्वोच्च शिखरों से ले कर दलितों की देहरी तक का सफर जारी रखा है... यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि उनका इंटलेक्चुअल विंग और देश-दुनिया के बड़े फैसलों पर एनालिसिलस से अवगत कराता है, और वह खुद इस काम में शामिल होते हैं। अब जरा आप सोच कर बताएं कि इतने गहरे अनुभव वाले इतने किस युवा को आप जानते हैं.... रहा सवाल मीडिया का तो जहां गुड होगा वही.... आप कम समझदार नहीं है पीआर वाले ज्यादा बेहतर जानते हैं कि संभावना कहां है ट्रेन और पालीथीन को हल्के में मत ले लेना दरअसल यह स्टेटमेंट है कि कोई तो है जो हथेली पर शिखर रखा होने के बाद भी धरा की बात कर सकता है...
आप चाहेंगे तो तथ्यों के साथ भी चर्चा जारी रहेगी....

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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर''

Writer & Editor & Published Hindi Monthly "JYOTISHNIKETAN SANDESH"

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