acharya

मैं आपसे पूछता हूं............आखिर राहुल और सोनिया गांधी का दोष क्या है.............?

बडे लंबे समय से इस बात पर बहस चल रही है कि गांधी परिवार के लोगों ने देश को नरक से भी बुरी स्थिति में लाकर खडा कर दिया है...............मैं आपसे पूछता हूं कि यदि ऐसा ही कि आजादी के बाद से भारत की अवनति के लिए नेहरू और गांधी परिवार जिम्मेदार है तो क्यों हम उन्हे सरकार बनाने का मौका देते आएं है...........क्यों आखिर इंडिया शायनिंग की चमक दमक केबाद भी विपक्ष बौना साबित हो गया............अगर राहुल या सोनिया का दोष इतना ही कि उसने इस देश में गांधी परिवार में जन्म लिया और सोनिया अपना सब कुछ छोडकर इस देश की होकर रह गई..........तो क्या हम खुद संकीर्ण मानसिकता और किसी कुंठित बीमारी से नहीं ग्रसित है.............मैं आपसे पूछता हूं इलाज की जरूरत किसे हैं देश को या खुद हमारी सोच.................मैं आपसे पूछता हूं क्या सिर्फ कांग्रेस ही जिम्मेदार है...........

Tags: .आजादी, आचार्य, केशव, गांधी, देश, राहुल, सोनिया

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NAHI CONGRESS KIO ZIMMEDARA HOGI??

DOSH UN MAHAN LOGO KA HE..

JINKE PAS SELF-ESTEEM NAHI HOTA..

JINKE SIR PAR GULAMI SIR CHAD KAR BOLTI HE..

JO SWAYM KUCH BHI JANNA NAHI CHATA..

KEWAL GHUTTI PINA JANTA HE

SELF-ESTEEM KIYA HOTI HE..ISRAEL SE SEEKHNI PADEGI...SHAYAD..
क्यों भाई कहां गये सब लोग........
... इस देश की बदतर स्थिति के लिये किसी एक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता !!!
मित्र आचार्य को मेरा देल्ही सहर से नमस्कार. राहुल और प्रियंका से हमें केवल एक ही परेशानी है. जब इस देश से राजों को समाप्त किया गया तो एक ही बात कही गये, की क्यों राजा का बेटा ही राजा बने. एक ग़रीब का बेटा क्यों नहीं. उचे पद पर बेत सकता या यूँ कहो की राजा बन सकता! राहुल और प्रियंका उस परिवारवाद का सबसे बड़ा सिंबल हैं. आज सभी नेताओं के बचे राजनीति में आ गए हैं क्योकि नेहरू परिवार ने इसकी शुरूवात की. . अगर राजा का बेटा राजा नहीं बन सकता तो राजनेता का बेटा भी राजनेता नहीं बनाना चाहिए. सोनिया जी ने हिन्दुस्तान की सिटिज़नशिप राजीव के मरने के बाद ली है. मगर सोनिया जी एक बेहतर नेता है. उन्होने देश के लोगों को आर0टी0ई0 जैसे अचूक हत्यार दिया.
मेरी और भोपाल वालों की तरफ से आपको हार्दिक अभिनंदन..........क्यों दोस्त संविधान में पारित किया गया है क्या ऐसा.......मैं एक बात बोलूं क्यो आम तौर पर देखा जाता है कि डाक्टर का बेटा डाक्टर....इंजीनियर का बेटा इंजीनियर........और भी ना जाने क्या बनते हैं........जो परिवार में होता आया है उससे कहीं ना कहीं हम सब जुडे हुए होते हैं.......मजा तो तब आये जब आप अपने बेटे से कहें या वो दूर किसी गांव में जाकर किसान बने.........आपके उत्तर की प्रतीक्षा में.........

Rajinder Katoch said:
मित्र आचार्य को मेरा देल्ही सहर से नमस्कार. राहुल और प्रियंका से हमें केवल एक ही परेशानी है. जब इस देश से राजों को समाप्त किया गया तो एक ही बात कही गये, की क्यों राजा का बेटा ही राजा बने. एक ग़रीब का बेटा क्यों नहीं. उचे पद पर बेत सकता या यूँ कहो की राजा बन सकता! राहुल और प्रियंका उस परिवारवाद का सबसे बड़ा सिंबल हैं. आज सभी नेताओं के बचे राजनीति में आ गए हैं क्योकि नेहरू परिवार ने इसकी शुरूवात की. . अगर राजा का बेटा राजा नहीं बन सकता तो राजनेता का बेटा भी राजनेता नहीं बनाना चाहिए. सोनिया जी ने हिन्दुस्तान की सिटिज़नशिप राजीव के मरने के बाद ली है. मगर सोनिया जी एक बेहतर नेता है. उन्होने देश के लोगों को आर0टी0ई0 जैसे अचूक हत्यार दिया.
जी ठीक है मैने ही मंहगाई डायन लिखा था याद है ना.........मैने ही 25 साले के आसू्ओं का मोल 25 हजार लिखा था.... और फिर किस चैनल में क्या दिखाया जा रहा है इस बात को कभी फोन पर बताउंगा राज क्या होता है............बाबू कौन क्या दिखा रहा है क्यो दिखा रहा है एक दूसरा प्रश्न है................रही बात टिप्पणी की तो मैने जानबूझ कर ये प्रश्न किया है.....जबाब आने दो खुद ही पता चल जायेगा ऐसा क्यूं किया...........रही बात पार्टी की तो इस पर ना तो मैं बात करना पसंद करता हूं और नाही करूगां..........ये बात उन राजनेताओ के लिए ही छोड दो.........तीसरी बात संपत्ति बढ़ गई तो क्या तुम्हे पता है भारत में 95 प्रतिशत पत्रकार पत्रकारिता के साथ दूसरा व्यवसाय भी करतेहैं.........अगर तुम्हे जानना ही है तो RIT है ना लगा दो पता चल जायेगा.............अंबानी,टाटा,विडला के पास इतना पैसा कहां से आया सवाल इस पर भी खडे होते हैं.........तुम्हारे यहां के सांसदो विधायको और सरपंच से लेकर जिला पंचायत के सदस्यों के पास चुनाव जीतने से पहले क्या था और अब क्या है पता असलियत सामने आ जायेगी.............फिलहाल जो प्रश्न मैने छेड़ा है उसका उत्तर दें.........और हां जिस आरआईटी को लगाओगे वह कांग्रेस की ही देन ध्यान रखना............।और मेरी निष्पक्षता या पक्षता पर प्रश्न मत खड़ा करो...........इसे मेरे लिए ही रहने दो

Sumant said:
मुझे लगता था कि आप एक निष्पक्ष पत्रकार हैं, लेकिन अब राय बदल रही है। आप मुझे हमेशा सलाह देते हैं कि मै अपने विचारों को किसी एक व्यक्ति, पार्टी या विचारधारा तक सीमित न करूं। लेकिन लग रहा है कि मैं भी आपका एक मित्र होने के नाते आपको वही सलाह दूँ। pravakta.com पर आपका लेख मैंने पढ़ा है और आपके विचारों व भाषा-शैली से मैं बहुत प्रभावित हूं। मुझे आपमें अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं, लेकिन दुःख है कि आप अपनी क्षमताओं को केवल राहुल प्रेम तक सीमित कर रहे हैं। इसलिये आपके इस डिस्कशन पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।
वैसे भी मैं 'राहुल को मेरी नमस्कार' वाले डिस्कशन में इतना कुछ पूछ चुका हूं, जिसके जवाब मुझे अभी तक नहीं मिले। तो अब कुछ लिखने से फायदा ही क्या है? मैं तो इस उम्मीद के साथ प्रश्न रखता हूं कि शायद मुझे कोई नई जानकारी मिलेगी और मेरे विचारों का दायरा बढ़ेगा। लेकिन मुझे सिर्फ निराशा ही मिलती है। तो घूम-फिरकर वही चर्चा करते रहने से हासिल क्या होने वाला है? फिर भी आपने मुद्दा राहुल गांधी के नाम से ही उठाया है, तो एक बात का उल्लेख करना चाहता हूं। अभी-अभी NDTV INDIA पर देख रहा था कि सांसदों की संपत्ति में 2004 से 2009 के पांच वर्षों में कितनी वृद्धि हुई है। राहुल गांधी की संपत्ति 414% बढ़ी है। मुझे आश्चर्य है कि ये कैसे हुआ? आखिर राहुल जी ऐसा कौन सा व्यवसाय करते हैं कि पूरे विश्व में छाई मंदी के बावजूद उनकी संपत्ति इतनी तेज़ी से बढ़ी है? वो भी 10-20, 50-100 प्रतिशत नहीं, पूरे 414%. मेरे जैसे सामान्य युवा के पास इतने बड़े सवाल का कोई जवाब नहीं है और मैं जानता हूं कि पूछने से कोई फायदा भी नहीं है क्योंकि मैने इसी मीडिया क्लब पर किसी डिस्कशन में पढ़ा था कि चेन्नई के एक अखबार ने राहुल गांधी की डिग्री के बारे में पूछ लिया था, तो उसे कांग्रेस ने जानकारी देने के बजाय कानूनी नोटिस थमा दिया। पहले हम स्कूल में पढ़ते थे कि नेहरू जी इंग्लैंड गए और वकालत की पढ़ाई करके बैरिस्टर बनकर लौटे। उनके बारे में ऐसी जानकारियां पढ़कर हमें प्रेरणा मिलती थी कि हम भी ऐसा कुछ करें। पहले लोग नेताओं की शिक्षा के बारे में जानकारी प्राप्त करके उनसे प्रेरणा लिया करते थे, आज कानूनी नोटिस के जवाब ढूंढ रहे हैं!!

एक और खबर अभी थोड़ी देर पहले ही किसी न्यूज चैनल पर देखी थी। कांग्रेस की सदस्य संख्या पिछले साल 4 करोड़ थी, जो अब घटकर ढाई करोड़ रह गई है। मुझे कुछ कहना नहीं है, कोई टिप्पणी नहीं करनी है। केवल एक समाचार सभी लोगों के साथ बांट रहा हूं। कृपया इसका कोई सूक्ष्म अर्थ निकालकर मुझे किसी पार्टी या संगठन का सदस्य घोषित न करें!!
निकाल कर जंजीरों से
टांग दिया सलीब पर
अब किसी हथौड़े की चोट
किसी कील की चुभन
कोई असर नहीं करते
मर चुका है देश
ताबूत का प्रबंध करो

इस देश में आत्मघाती कपट-तंत्र की आधार शिला, कांग्रेसपार्टी की रखी हुई है ... हालाँकि, शास्त्री जी, श्रीमती इंदिरा गाँधी और भी कुछ नेताओं ने(राजीव गाँधी का नाम नहीं लूँगा) अपने अपने समय में दिशा देने के प्रयास किये लेकिन कांग्रेस पार्टी स्वयं में जिन तत्वों के मिश्रण से बनी है वे महा चोर भ्रष्ट-शिरोमणि हैं ...कांग्रेस की इस शनिछरी छाया से इस देश की कोई पार्टी अपने को नहीं बचा सकी..अब तो हाल ये है
चोर जनता डाकू सरकार ये है इंडिया मेरे यार
मेरे पास जमीन होती मैं तो कब का भाग गया होता गाँव..बच्चों को स्कूल कालेज की शक्ल भी न देखने देता

acharya said:
मेरी और भोपाल वालों की तरफ से आपको हार्दिक अभिनंदन..........क्यों दोस्त संविधान में पारित किया गया है क्या ऐसा.......मैं एक बात बोलूं क्यो आम तौर पर देखा जाता है कि डाक्टर का बेटा डाक्टर....इंजीनियर का बेटा इंजीनियर........और भी ना जाने क्या बनते हैं........जो परिवार में होता आया है उससे कहीं ना कहीं हम सब जुडे हुए होते हैं.......मजा तो तब आये जब आप अपने बेटे से कहें या वो दूर किसी गांव में जाकर किसान बने.........आपके उत्तर की प्रतीक्षा में.........

Rajinder Katoch said:
मित्र आचार्य को मेरा देल्ही सहर से नमस्कार. राहुल और प्रियंका से हमें केवल एक ही परेशानी है. जब इस देश से राजों को समाप्त किया गया तो एक ही बात कही गये, की क्यों राजा का बेटा ही राजा बने. एक ग़रीब का बेटा क्यों नहीं. उचे पद पर बेत सकता या यूँ कहो की राजा बन सकता! राहुल और प्रियंका उस परिवारवाद का सबसे बड़ा सिंबल हैं. आज सभी नेताओं के बचे राजनीति में आ गए हैं क्योकि नेहरू परिवार ने इसकी शुरूवात की. . अगर राजा का बेटा राजा नहीं बन सकता तो राजनेता का बेटा भी राजनेता नहीं बनाना चाहिए. सोनिया जी ने हिन्दुस्तान की सिटिज़नशिप राजीव के मरने के बाद ली है. मगर सोनिया जी एक बेहतर नेता है. उन्होने देश के लोगों को आर0टी0ई0 जैसे अचूक हत्यार दिया.
खेद के साथ लिख रहा हूँ ...शब्द के प्रति मुझे जिम्मेदार होना चाहिए था.. चूक हो गयी.. संयोजकों से निवेदन है की मेरी उपरोक्त दोनों टिप्पणीयों को निकाल दें कृपा होगी
Politicians ko agr koi swal karta hai ki kya baat hai ki apka beta bhi politics me aa raha hai To woh jwab dete hain, Jaisa ki aapne bhi kisi ke defence me likha """Doctor ka beta doctor aur Engineer ka beta Engineer vagaira" Lekin kya Doctor banane ke lie, Engineer banane ke lie kuch parna parta hai ki nahi Kuch qualification chahye ki nahi.. Aur pad kar bhi agar doctor ya engineer ke bete me kabliat nahi to woh kamyaab nahi ho sakte chahe uske piche unke baap ka kitna bhi haath kyon na ho.Lekin Politics me aisa nahi hai yen,ken prakren inko apne baap dada ki gadi virast me mil hi jaati hai.Ek baat kahunga ka Sonia Gandhi bhi apne pati ki trah hi politics me lie gai hain Kyonki Congress Party ke pas koi chehra aisa nahi jo sabko ikatha kar sake. .Unki kya qualification hai unhone kab bharat ki nagrikta li yeh swal to vipaksh ke log uchalenge hi. Yahi baat Rahul par bhi lagu hoti hai. Congree party ke jitne bhi Media manger hain woh kabhi bhi nahi chahenge ki unke baare me koi "Uncomfortable" swal pooche jayen .Is desh par agar sab se ziada raaj kia hai to woh Congress party hai to agar kisi baat ka dosh dena banta hai to woh bhi issi ko jaana chahiye ya kewal ache kaamon ki shabshi hi nigalte banti hai.Apki ek tipni me para ki sarpanch se lekar saansadon tak ke pass chunao se pehle kya tha aur baad me kya dekho to pata chal jayaga. Yeh baat bilkul sahi hai. Mera maanana hai ki "THE QUEEN /KIng should be above suspicion".
Mitre Acharya, Doctor ka beta doctor keval kabliyat say banta hai. Engineer ka beta keval engineer tabhi ban sakta hai agar vo AIEEE ya IIT mein qualify kare. Aap ko maloon hoga, ki Patna mein ek 30 Star institute hay. Har saal 30 bache IIT pariksha mein bethathe hain aur 28-29 bache qualify karte hain. Yeh bache doctor ya engineer key bache nahin balke garib rickshaw puller, vegetable vedors, labour class ko belong karte hain.

Rajneta ka beta Rajneta banta hai bina qualification key. Yeh dosh reservation say bhi zayada gambhir hai. Rajiv Gandhi mere bhi priya Pradhan Mantri thae kintu unhone intermediate bhi complete nahin ki aur Indian Airlines ka plane udate thae. Kya aap aur mere bachon ko yeh facility milegi. Kya ek doctor ka beta agar doctor na ban sake to Rajiv ki tarah pilot ban jaye. Sochne ki baat hai. Kahne ko to Constitution mein bahut kuch hai, par sab adhikaron ki baat karte hain, duties ki nahin. Agar Rajneta ka beta Rajneta hi banana chaiye to Rahvadon ko kyon samapat kar diya? Nehru-Indira-Rajiv-Rahul-?-?-? Yeh undemocratic railgadi kab tak aap chalana chayte hain.

acharya said:
मेरी और भोपाल वालों की तरफ से आपको हार्दिक अभिनंदन..........क्यों दोस्त संविधान में पारित किया गया है क्या ऐसा.......मैं एक बात बोलूं क्यो आम तौर पर देखा जाता है कि डाक्टर का बेटा डाक्टर....इंजीनियर का बेटा इंजीनियर........और भी ना जाने क्या बनते हैं........जो परिवार में होता आया है उससे कहीं ना कहीं हम सब जुडे हुए होते हैं.......मजा तो तब आये जब आप अपने बेटे से कहें या वो दूर किसी गांव में जाकर किसान बने.........आपके उत्तर की प्रतीक्षा में.........

Rajinder Katoch said:
मित्र आचार्य को मेरा देल्ही सहर से नमस्कार. राहुल और प्रियंका से हमें केवल एक ही परेशानी है. जब इस देश से राजों को समाप्त किया गया तो एक ही बात कही गये, की क्यों राजा का बेटा ही राजा बने. एक ग़रीब का बेटा क्यों नहीं. उचे पद पर बेत सकता या यूँ कहो की राजा बन सकता! राहुल और प्रियंका उस परिवारवाद का सबसे बड़ा सिंबल हैं. आज सभी नेताओं के बचे राजनीति में आ गए हैं क्योकि नेहरू परिवार ने इसकी शुरूवात की. . अगर राजा का बेटा राजा नहीं बन सकता तो राजनेता का बेटा भी राजनेता नहीं बनाना चाहिए. सोनिया जी ने हिन्दुस्तान की सिटिज़नशिप राजीव के मरने के बाद ली है. मगर सोनिया जी एक बेहतर नेता है. उन्होने देश के लोगों को आर0टी0ई0 जैसे अचूक हत्यार दिया.
ऐसा तो ना कहिए हुजूर............

shyam said:
मेरे पास जमीन होती मैं तो कब का भाग गया होता गाँव..बच्चों को स्कूल कालेज की शक्ल भी न देखने देता

acharya said:
मेरी और भोपाल वालों की तरफ से आपको हार्दिक अभिनंदन..........क्यों दोस्त संविधान में पारित किया गया है क्या ऐसा.......मैं एक बात बोलूं क्यो आम तौर पर देखा जाता है कि डाक्टर का बेटा डाक्टर....इंजीनियर का बेटा इंजीनियर........और भी ना जाने क्या बनते हैं........जो परिवार में होता आया है उससे कहीं ना कहीं हम सब जुडे हुए होते हैं.......मजा तो तब आये जब आप अपने बेटे से कहें या वो दूर किसी गांव में जाकर किसान बने.........आपके उत्तर की प्रतीक्षा में.........

Rajinder Katoch said:
मित्र आचार्य को मेरा देल्ही सहर से नमस्कार. राहुल और प्रियंका से हमें केवल एक ही परेशानी है. जब इस देश से राजों को समाप्त किया गया तो एक ही बात कही गये, की क्यों राजा का बेटा ही राजा बने. एक ग़रीब का बेटा क्यों नहीं. उचे पद पर बेत सकता या यूँ कहो की राजा बन सकता! राहुल और प्रियंका उस परिवारवाद का सबसे बड़ा सिंबल हैं. आज सभी नेताओं के बचे राजनीति में आ गए हैं क्योकि नेहरू परिवार ने इसकी शुरूवात की. . अगर राजा का बेटा राजा नहीं बन सकता तो राजनेता का बेटा भी राजनेता नहीं बनाना चाहिए. सोनिया जी ने हिन्दुस्तान की सिटिज़नशिप राजीव के मरने के बाद ली है. मगर सोनिया जी एक बेहतर नेता है. उन्होने देश के लोगों को आर0टी0ई0 जैसे अचूक हत्यार दिया.

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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर''

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