मित्र आचार्य को मेरा देल्ही सहर से नमस्कार. राहुल और प्रियंका से हमें केवल एक ही परेशानी है. जब इस देश से राजों को समाप्त किया गया तो एक ही बात कही गये, की क्यों राजा का बेटा ही राजा बने. एक ग़रीब का बेटा क्यों नहीं. उचे पद पर बेत सकता या यूँ कहो की राजा बन सकता! राहुल और प्रियंका उस परिवारवाद का सबसे बड़ा सिंबल हैं. आज सभी नेताओं के बचे राजनीति में आ गए हैं क्योकि नेहरू परिवार ने इसकी शुरूवात की. . अगर राजा का बेटा राजा नहीं बन सकता तो राजनेता का बेटा भी राजनेता नहीं बनाना चाहिए. सोनिया जी ने हिन्दुस्तान की सिटिज़नशिप राजीव के मरने के बाद ली है. मगर सोनिया जी एक बेहतर नेता है. उन्होने देश के लोगों को आर0टी0ई0 जैसे अचूक हत्यार दिया.
मुझे लगता था कि आप एक निष्पक्ष पत्रकार हैं, लेकिन अब राय बदल रही है। आप मुझे हमेशा सलाह देते हैं कि मै अपने विचारों को किसी एक व्यक्ति, पार्टी या विचारधारा तक सीमित न करूं। लेकिन लग रहा है कि मैं भी आपका एक मित्र होने के नाते आपको वही सलाह दूँ। pravakta.com पर आपका लेख मैंने पढ़ा है और आपके विचारों व भाषा-शैली से मैं बहुत प्रभावित हूं। मुझे आपमें अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं, लेकिन दुःख है कि आप अपनी क्षमताओं को केवल राहुल प्रेम तक सीमित कर रहे हैं। इसलिये आपके इस डिस्कशन पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।
वैसे भी मैं 'राहुल को मेरी नमस्कार' वाले डिस्कशन में इतना कुछ पूछ चुका हूं, जिसके जवाब मुझे अभी तक नहीं मिले। तो अब कुछ लिखने से फायदा ही क्या है? मैं तो इस उम्मीद के साथ प्रश्न रखता हूं कि शायद मुझे कोई नई जानकारी मिलेगी और मेरे विचारों का दायरा बढ़ेगा। लेकिन मुझे सिर्फ निराशा ही मिलती है। तो घूम-फिरकर वही चर्चा करते रहने से हासिल क्या होने वाला है? फिर भी आपने मुद्दा राहुल गांधी के नाम से ही उठाया है, तो एक बात का उल्लेख करना चाहता हूं। अभी-अभी NDTV INDIA पर देख रहा था कि सांसदों की संपत्ति में 2004 से 2009 के पांच वर्षों में कितनी वृद्धि हुई है। राहुल गांधी की संपत्ति 414% बढ़ी है। मुझे आश्चर्य है कि ये कैसे हुआ? आखिर राहुल जी ऐसा कौन सा व्यवसाय करते हैं कि पूरे विश्व में छाई मंदी के बावजूद उनकी संपत्ति इतनी तेज़ी से बढ़ी है? वो भी 10-20, 50-100 प्रतिशत नहीं, पूरे 414%. मेरे जैसे सामान्य युवा के पास इतने बड़े सवाल का कोई जवाब नहीं है और मैं जानता हूं कि पूछने से कोई फायदा भी नहीं है क्योंकि मैने इसी मीडिया क्लब पर किसी डिस्कशन में पढ़ा था कि चेन्नई के एक अखबार ने राहुल गांधी की डिग्री के बारे में पूछ लिया था, तो उसे कांग्रेस ने जानकारी देने के बजाय कानूनी नोटिस थमा दिया। पहले हम स्कूल में पढ़ते थे कि नेहरू जी इंग्लैंड गए और वकालत की पढ़ाई करके बैरिस्टर बनकर लौटे। उनके बारे में ऐसी जानकारियां पढ़कर हमें प्रेरणा मिलती थी कि हम भी ऐसा कुछ करें। पहले लोग नेताओं की शिक्षा के बारे में जानकारी प्राप्त करके उनसे प्रेरणा लिया करते थे, आज कानूनी नोटिस के जवाब ढूंढ रहे हैं!!
एक और खबर अभी थोड़ी देर पहले ही किसी न्यूज चैनल पर देखी थी। कांग्रेस की सदस्य संख्या पिछले साल 4 करोड़ थी, जो अब घटकर ढाई करोड़ रह गई है। मुझे कुछ कहना नहीं है, कोई टिप्पणी नहीं करनी है। केवल एक समाचार सभी लोगों के साथ बांट रहा हूं। कृपया इसका कोई सूक्ष्म अर्थ निकालकर मुझे किसी पार्टी या संगठन का सदस्य घोषित न करें!!
मेरी और भोपाल वालों की तरफ से आपको हार्दिक अभिनंदन..........क्यों दोस्त संविधान में पारित किया गया है क्या ऐसा.......मैं एक बात बोलूं क्यो आम तौर पर देखा जाता है कि डाक्टर का बेटा डाक्टर....इंजीनियर का बेटा इंजीनियर........और भी ना जाने क्या बनते हैं........जो परिवार में होता आया है उससे कहीं ना कहीं हम सब जुडे हुए होते हैं.......मजा तो तब आये जब आप अपने बेटे से कहें या वो दूर किसी गांव में जाकर किसान बने.........आपके उत्तर की प्रतीक्षा में.........
Rajinder Katoch said:मित्र आचार्य को मेरा देल्ही सहर से नमस्कार. राहुल और प्रियंका से हमें केवल एक ही परेशानी है. जब इस देश से राजों को समाप्त किया गया तो एक ही बात कही गये, की क्यों राजा का बेटा ही राजा बने. एक ग़रीब का बेटा क्यों नहीं. उचे पद पर बेत सकता या यूँ कहो की राजा बन सकता! राहुल और प्रियंका उस परिवारवाद का सबसे बड़ा सिंबल हैं. आज सभी नेताओं के बचे राजनीति में आ गए हैं क्योकि नेहरू परिवार ने इसकी शुरूवात की. . अगर राजा का बेटा राजा नहीं बन सकता तो राजनेता का बेटा भी राजनेता नहीं बनाना चाहिए. सोनिया जी ने हिन्दुस्तान की सिटिज़नशिप राजीव के मरने के बाद ली है. मगर सोनिया जी एक बेहतर नेता है. उन्होने देश के लोगों को आर0टी0ई0 जैसे अचूक हत्यार दिया.
मेरी और भोपाल वालों की तरफ से आपको हार्दिक अभिनंदन..........क्यों दोस्त संविधान में पारित किया गया है क्या ऐसा.......मैं एक बात बोलूं क्यो आम तौर पर देखा जाता है कि डाक्टर का बेटा डाक्टर....इंजीनियर का बेटा इंजीनियर........और भी ना जाने क्या बनते हैं........जो परिवार में होता आया है उससे कहीं ना कहीं हम सब जुडे हुए होते हैं.......मजा तो तब आये जब आप अपने बेटे से कहें या वो दूर किसी गांव में जाकर किसान बने.........आपके उत्तर की प्रतीक्षा में.........
Rajinder Katoch said:मित्र आचार्य को मेरा देल्ही सहर से नमस्कार. राहुल और प्रियंका से हमें केवल एक ही परेशानी है. जब इस देश से राजों को समाप्त किया गया तो एक ही बात कही गये, की क्यों राजा का बेटा ही राजा बने. एक ग़रीब का बेटा क्यों नहीं. उचे पद पर बेत सकता या यूँ कहो की राजा बन सकता! राहुल और प्रियंका उस परिवारवाद का सबसे बड़ा सिंबल हैं. आज सभी नेताओं के बचे राजनीति में आ गए हैं क्योकि नेहरू परिवार ने इसकी शुरूवात की. . अगर राजा का बेटा राजा नहीं बन सकता तो राजनेता का बेटा भी राजनेता नहीं बनाना चाहिए. सोनिया जी ने हिन्दुस्तान की सिटिज़नशिप राजीव के मरने के बाद ली है. मगर सोनिया जी एक बेहतर नेता है. उन्होने देश के लोगों को आर0टी0ई0 जैसे अचूक हत्यार दिया.
मेरे पास जमीन होती मैं तो कब का भाग गया होता गाँव..बच्चों को स्कूल कालेज की शक्ल भी न देखने देता
acharya said:मेरी और भोपाल वालों की तरफ से आपको हार्दिक अभिनंदन..........क्यों दोस्त संविधान में पारित किया गया है क्या ऐसा.......मैं एक बात बोलूं क्यो आम तौर पर देखा जाता है कि डाक्टर का बेटा डाक्टर....इंजीनियर का बेटा इंजीनियर........और भी ना जाने क्या बनते हैं........जो परिवार में होता आया है उससे कहीं ना कहीं हम सब जुडे हुए होते हैं.......मजा तो तब आये जब आप अपने बेटे से कहें या वो दूर किसी गांव में जाकर किसान बने.........आपके उत्तर की प्रतीक्षा में.........
Rajinder Katoch said:मित्र आचार्य को मेरा देल्ही सहर से नमस्कार. राहुल और प्रियंका से हमें केवल एक ही परेशानी है. जब इस देश से राजों को समाप्त किया गया तो एक ही बात कही गये, की क्यों राजा का बेटा ही राजा बने. एक ग़रीब का बेटा क्यों नहीं. उचे पद पर बेत सकता या यूँ कहो की राजा बन सकता! राहुल और प्रियंका उस परिवारवाद का सबसे बड़ा सिंबल हैं. आज सभी नेताओं के बचे राजनीति में आ गए हैं क्योकि नेहरू परिवार ने इसकी शुरूवात की. . अगर राजा का बेटा राजा नहीं बन सकता तो राजनेता का बेटा भी राजनेता नहीं बनाना चाहिए. सोनिया जी ने हिन्दुस्तान की सिटिज़नशिप राजीव के मरने के बाद ली है. मगर सोनिया जी एक बेहतर नेता है. उन्होने देश के लोगों को आर0टी0ई0 जैसे अचूक हत्यार दिया.
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