राष्ट्रमंडल खेलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की खबरें सुखिर्यों में है, ऐसे में उचित नहीं होगा सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाना।
सांसदों को अपने वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी के लिए कुछ और समय इंतजार करना पड़ सकता है। कैबिनेट ने इससे संबंधित विधेयक को सोमवार को अपनी मंजूरी नहीं दी। इससे अब इस विधेयक के संसद के चालू सत्र में आने की संभावना कम ही है। बताया जाता है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन इस पर फैसले को फिलहाल टाल दिया गया। सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट के कुछ सदस्यों का मानना था कि ऐसे में जबकि राष्ट्रमंडल खेलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की खबरें सुखिर्यों में है, सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाना उचित नहीं होगा। कुछ सदस्यों का मानना था कि इस मौहाल में सांसदों के वेतन बढ़ाने को जनता सही ढंग से नहीं लेगी। सांसदों को अभी 16,000 रुपये प्रति माह बतौर वेतन मिलता है, जिसे बढ़ाकर 50,000 रुपये करने का प्रस्ताव है। सांसदों की नाराजगी है कि उन्हें सरकार के सचिवों से भी कहीं कम वेतन मिलता है। सचिवों को 80,000 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है।
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Permalink Reply by D S Tripathi on August 17, 2010 at 12:22am
Permalink Reply by dharmendra shastri on August 17, 2010 at 12:58am
Permalink Reply by dharmendra shastri on August 17, 2010 at 12:59am
Permalink Reply by D S Tripathi on August 17, 2010 at 10:46am sansado dwara sansad me hangama machate dekho to inka vetan katne ki ichcha hoti hai. kai sansad to lapata rahte hai. aur kuch maujud rahte hai sote hu paye jate. in sansadoo ki pahel to anushashan ki pathsahala lagai jani chaihey
Permalink Reply by L.R.Gandhi on August 17, 2010 at 2:27pm
Permalink Reply by Rajinder Katoch on August 17, 2010 at 2:34pm
Permalink Reply by Rajesh on August 17, 2010 at 6:01pm
Permalink Reply by rakesh gupta on August 17, 2010 at 9:46pm वन्दे मातरम दोस्तों,
सांसदों को जो वेतन दिया जाता है वह धन आम जनता से करो के रूप मैं लिया जाता, जिस देश के अंदर लोग भूख, बीमारी अकाल आदि की चपेट मैं आकर मर रहे हो. उस देश मैं सांसद जो की प्रति वर्ष लगभग 26 लाख सालाना खर्च के लिए सफेद धन के रूप मैं पाता है (जिसके काले धन का कोई हिसाब नही है) वह अगर वेतन बड़ाने की बात करे तो यह नितांत हास्यास्पद है. एक व्यक्ति जो सांसद बनने के बाद अपनी सात पीड़ियों का इंतजाम करके जाता है आखिर वह इतना किस तरीके से कमाता है? क्या वेतन बडाने की बात करने वाले कोई नेताजी इसका जबाव देना पसंद करेंगे
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