rakesh gupta

माँ के ढूध को इस प्रकार ललकारना सर्वथा अनुचित है

वन्दे मातरम बड़े भैया रूपेश जी,
आपने जो लिखा की एक ही R N I नम्बर से एक ही शहर मैं नव भारत चल रहा है निसंदेह इसमें कही न कही नियमो की अनदेखी जरूर हुई है, इस पर आपका गुस्सा शायद जायज भी हो, मगर मैं आपसे कुछ पूछना चाहता हूँ.
क्या आपने पहले कभी इस मसले को मीडिया क्लब पर उठाया है ?? मुझे लगता है शायद नही, फिर इस ललकार का क्या ओचित्य हुआ .
क्या आपको लगता है की मीडिया क्लब से जुड़े लगभग 5000 सदस्यों को इस बात की जानकारी है की इस प्रकार से कोई अख़बार चल रहा है ?? शायद मीडिया क्लब के 5 प्रतिशत लोगों को ही इस बात की जानकारी हो की ऐसा कुछ हो रहा है, फिर सभी सदस्यों के मान के दूध को ललकारने का कारण ??
अब तीसरा और सबसे अहम सवाल आपको इस बात की जानकारी है की ये गलत हो रहा है तो आपने इसके निराकरण के लिया आखिर किया क्या है ?? बताएं
यदि आपने कुछ नही किया तो इसके निराकरण का तरीका मैं ( आपका बहुत छोटा भाई ) आपको बताता हूँ की आपको क्या करना चाहिए, आप समाचार पत्र पंजीयक कार्यालय मई एक RTI लगाइए जिसमे इस विषय पर जानकारी मांगिये की आखिर ये किस प्रकार हुआ ? अगर ये नियमो की अनदेखी है तो इसके लिए कौन जबाबदेह है ? यदि ये नियमानुसार है तो हवाला दे की ये किस नियम के अंतर्गत हुआ है ? आप इतने पर ही चुप ना रहिये आप खुद जाकर रजिस्ट्रार से मिले और इस अखवार की दो प्रति अलग अलग RNI नम्बर की ले जाकर उन्हें दिखा कर जितनी तल्खी के साथ आपने इस मंच पर अपना सवाल उठाया है उसी तल्खी के साथ इस सवाल का जबाव मांगे. आप इतने पर ही ना रुके आप नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर इस बारे मैं FIR दर्ज कराए, मेरे बड़े भैया इस कार्य में परेशानी अवश्य ही आएँगी मगर निसंदेह जीत सच की ही होगी और इसके बाद आप आने वाली परेशानियों को लेकर इस मंच से सलाह और मदद मांगे विसवाश रखिये आपको आपको दोनों ही चीजे जरूर मिलेंगी.
मै समझ सकता हूँ की आप आक्रामक प्रवर्ति के हैं इसलिए ही शायद आपके शब्दों मैं ये कडवाहट है. बड़े भैया मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ अगर मेरे शब्दों मैं आपको कडवाहट महसूस हो मगर मैं काफी भावुक हूँ शायद आक्रामक भी इसलिए आपके ही लहजे मैं आपसे पूछता हूँ संसद के दोषियों और मुम्बई के गुनाहगारों को आज तक माकूल सजा नही मिली तो यदि आपने अपनी ............का ढूध पिया है तो जाकर उन्हें फांसी पर चड़वाकर दिखाए क्या आप ऐसे कर सकते हैं शायद मैं ऐसा कर सकता हूँ यकीनन नही तो क्या मैंने और आपने अपनी माँ का ढूध नही पिया है.
बड़े भैया आपका इस तरह माँ के ढूध को ललकारना मुझ सहित सभी को यकीनन अखरा है आपके द्वारा उठाया विषय गलत नही है किन्तु आपके उताहने का तरीका निसंदेह घोर निंदनीय है, आप अपनी गलती को महसूस कर इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफीनामा लिखते हुए अपनी इस पोस्ट को हटा दे.
बड़े भैया माँ के ढूध को ललकारने का साहस तो खुद संसार के संहारक भगवान सिव भी नही कर सकते फिर आपकी और मेरी तो हस्ती ही क्या है,
माँ चाहे मेरी हो आपकी हो हममे से किसी की भी हो सदैव पूजनीय है उसका ढूध ही हमारी रगों मैं लहू बनकर दौड़ रहा है और हमे जीवन दे रहा है,
बड़े भैया मैं दौबारा आपसे माफ़ी चाहता हूँ अगर मेरे शब्दों मैं आपको कडवाहट महसूस हो.
सादर
आपका बहुत ही छोटा भाई.

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Main Bhi Shayad yahi kuchh likha raha tha. Thoda samay lag raha tha, kyunki main vivad ko badana nahin chahta tha.
Main aap ki baat ka samarthan karata hoon.
मेरा भी यही विचार है। रूपेश जी ने मुद्दा बहुत सही उठाया था, लेकिन भाषा थोड़ी आक्रामक हो गई।
वन्दे मातरम रूपेश जी,
एक अच्छी वार्ता बहस वही होती है जिसमे समाज के लिए कुछ सार्थक निकल कर आये मगर जब कोई वार्ता विचार विमर्श व्यक्तिगत टीका टिप्पणियों पर आ जाये तो उसमे सहज कटुता आ जाना स्वाभिक होता है, रही बात जस्टिस आनन्द सिंह को ललकारने की तो आपकी इस महानता का कोई प्रमाण हो तो सबूत सहित पेश करिये, रही बात दो मोबाईल रखने की तो इस प्रकार दो मोबिल रखने पर निम्न स्तरीय कटाछ कर आखिर आप साबित क्या करना चाहते हैं ये तो आप ही जाने,
RTI या और कुछ कमिया तो सभी विधेयको मैं होती उन्हें केवल कटाछ कर या विवादास्पद बाते कर खत्म नही किया जा सकता उसके लिए कुछ करने की आवश्यकता होती है, शायद आपने बहुत कुछ किया हो शायद आपने कुछ ना किया, बहुत सी बाते हो सकती हैं
आपने कहा उस मवाली से मेरी व्यक्तिगत रंजिश हो सकती है सम्भव है ऐसा ही हो, सम्भव तो ये भी है जस्टिस आनन्द सिंह से आपकी कोई व्यक्तिगत रंजिश हो या ये भी हो सकता है जिस अखवार की आप बात कर रहे हैं उसके लिए आप काम करते रहे हो और उसने आपकी किसी गलती पर बाहर का रास्ता दिखा दिया हो और आप दुर्भावना वश ये अनर्गल प्रचार कर रहे हो.
आप मुझे सजगता के लिए आइना दिखा रहे हैं आप मेरी जानकारियों को छोटा बता रहे हैं सम्भव है की हम दुसरे शहर के बारे मैं अधिक न जानते हो मगर अपने शहर के बारे मैं जानकारिया एक समझदार व्यक्ति को होती है मै आपको आपके ही शहर मुंबई की एक घटना बता रहा हूँ देखे इसकी आपको कितनी जानकारी है और जस्टिस आनन्द सिंह को ललकारने वाला इस पर किसी अफसर से बात कर क्या करवा सकता है
श्री मन जी मुम्बई के एक रेलवे विद्यालय के अन्दर 26 जनवरी 2010 को राष्ट्र ध्वज को उल्टा लटका कर घोर अपमान किया गया, (ये मामला मीडिया मैं भी चर्चित रहा ) इस पर एक FIR भी उसी दिन दर्ज हुई मगर कार्यवाही के नाम पर अब तक भी कुछ नही हुआ, मेरी खुद इस मामले मैं सम्बन्धित DCP से फोन पर बात भी हुई उन्होंने मुझे कार्यवाही का आश्वाशन भी दिया,
अपने मुंह मिया मिट्ठू बनने मैं कुछ जाता नही है जस्टिस आनन्द सिंह को ललकारने वाला देखे इस मामले मैं क्या करता है किस किस को ललकारता है या फिर ये केवल दूसरो को उकसाने तक ही सीमित रह जाने वाली बात है.
महोदय मेरे और आपके बीच ये मसला बेहद बेतुका है. बात केवल इतनी थी की आपके द्वारा उठाये गये एक सही विषय को उसकी भाषा ने कलुषित कर दिया, और आपका जो स्वभाव मुझे लगा उसमे यही दिखा की ""पंचो की राय सरमाथे पर परनाला यही गिरेगा"" और ऐसे व्यक्ति से जीतना सम्भव ही नही है,
मुझे आपसे बहुत कुछ सीखने को मिला. इतना ही कहूँगा
"" जो गलती ना करे उसे भगवान कहते हैं,
जो गलती कर कुछ सीख ले उसे इंसान कहते है""
"माँ के ढूध को इस प्रकार ललकारना सर्वथा अनुचित है"
mene poora nahi PADA..
KEWAL IS LINE PAR COMMENT DE RAHI HU..
माँ के ढूध को इस प्रकार ललकारना सर्वथा अनुचित है.....HA HA..
YHA PURANE ZAMANE KI BAT HO GAI ..
SAB DABBE KA ढूध PITE KE..
SAB DABBE KE ढूध WALE BACHHE HE..
ISLIYA KOI BHI AB SUBHASH BOSE. VINAYAK YA SHIVAJI JESE NAHI HOTE..
vajib bat hai aakhir aam admi ke liye rni koi mayne nahi rakhta or na hi use jankari hai...ham khud hi nahi samajh pa rahe ki isme galat hi kya hai...aakhir yahan to kai log vigyapan labh ke liye bina rni athwa black listed title se hi akhbar chhap dalte hain.....agar kisi ko koi bat akharti hai to apne satar par karwai ke liye savtantar hai....
BHASA AAPKI AAKRAMAK HAI AUR GUSSA BHI JAYAJ LEKIN SIR LEKIN, JIS DESH ME BADE BADE MAFIYA AUR NAXAL AATANKWAADIYO KE MUDDE PER SARKAAR KHAMOSH RAHTI HAI TAB AAPKO GUSSA KYO NAHI AATA LEKIN CHALIYE AAPKA GUSSA JAYAJ HAI AUR ISI BAHANE MEDIA CLUB KE BAHUT SAARE SADSYO KO YE PATA CHAL KI RNI NO BHI KUCH HOTA HAI, SIR HUME LAGTA HAI HUME ORGANISE HOKER KISI PARIWARTAN KI OR DHYAN DENA CHAHIYE JISSE DESH KA BHALA HO NAA KI 1 DUSRE PR AAROP PRTYAROP LAGATE RAHE, KYOKI AAJ TAK YAHI TO HOTA AAYA HAI, AB OUR NAHI HUME HUMAARI SOCH KO BADALNA HI HOGA.....................THANK YOU SIR AAP AAGE BADE HUM LOGO SE JO BHI HOGA HUM KARENGE PURI MEDIA CLUB AAPKE SOCH KE SAATH RAHEGI SAYAD AUR HONA BHI CHAHIYE.........
वन्दे मातरम दोस्त,
दीपा विश्वाश जी कभी भी पूरी बात जाने बगैर अधकचरा जानकारी के कारण कई बार अर्थ का अनर्थ हो जाता.( खैर आपसे कोई शिकायत नही है क्योंकि आपने पहले ही साफ कर दिया की आप केवल ताईटल पर कमेंट्स कर रही हैं)
सब डब्बे का ढूध पीते हैं, ऐसा शायद महानगरों मैं ठीक हैं मगर गाँव देहात में बच्चा आज भी माँ के ढूध पर ही आँख खोलता है, और आज भी देश मैं सुभाष चन्द्र बोस, भगत सिंह या शिवाजी जैसी सोच रखने वाले नौजवानों की कोई कमी नही है, लेकिन बद किस्मती से इस सिस्टम की मेहरवानी से इनकी सोच कुंद हो गई है जरूरत है उस सोच को सही राह दिखाने की .

deepa biswas said:
"माँ के ढूध को इस प्रकार ललकारना सर्वथा अनुचित है"
mene poora nahi PADA..
KEWAL IS LINE PAR COMMENT DE RAHI HU..
माँ के ढूध को इस प्रकार ललकारना सर्वथा अनुचित है.....HA HA..
YHA PURANE ZAMANE KI BAT HO GAI ..
SAB DABBE KA ढूध PITE KE..
SAB DABBE KE ढूध WALE BACHHE HE..
ISLIYA KOI BHI AB SUBHASH BOSE. VINAYAK YA SHIVAJI JESE NAHI HOTE..
वन्दे मातरम दोस्त,
राजेश जी धन्यवाद हम सब मिलकर देश के लिए कुछ कर सके तो ये हम सबके लिए गौरव की बात होगी.

Rajesh said:
BHASA AAPKI AAKRAMAK HAI AUR GUSSA BHI JAYAJ LEKIN SIR LEKIN, JIS DESH ME BADE BADE MAFIYA AUR NAXAL AATANKWAADIYO KE MUDDE PER SARKAAR KHAMOSH RAHTI HAI TAB AAPKO GUSSA KYO NAHI AATA LEKIN CHALIYE AAPKA GUSSA JAYAJ HAI AUR ISI BAHANE MEDIA CLUB KE BAHUT SAARE SADSYO KO YE PATA CHAL KI RNI NO BHI KUCH HOTA HAI, SIR HUME LAGTA HAI HUME ORGANISE HOKER KISI PARIWARTAN KI OR DHYAN DENA CHAHIYE JISSE DESH KA BHALA HO NAA KI 1 DUSRE PR AAROP PRTYAROP LAGATE RAHE, KYOKI AAJ TAK YAHI TO HOTA AAYA HAI, AB OUR NAHI HUME HUMAARI SOCH KO BADALNA HI HOGA.....................THANK YOU SIR AAP AAGE BADE HUM LOGO SE JO BHI HOGA HUM KARENGE PURI MEDIA CLUB AAPKE SOCH KE SAATH RAHEGI SAYAD AUR HONA BHI CHAHIYE.........

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