राजनीति में खलबली मचा रहा है मोदी का उपवास
गुजरात सरकार भुगतेगी मोदी के उपवास स्थान का 15 लाख रूपए
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब से 17 सितम्बर से उपवास करने की घोषणा की है तभी से राजनैतिक गर्मा ने लगी है। गुरूवार को मोदी ने अपने उपवास स्थान की घोषणा की कर दी। मोदी का उपवास स्थान अहमदाबाद के बीचोबीच स्थित विश्वविद्यालय का हॉल है। जिसका प्रतिदिन का किराया पांच लाख रूपए है और मोदी तीन दिन तक इस हॉल में उपवास करेंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति ने बताया कि नरेन्द्र मोदी शांति, एकता एवं सामाजिक सद्भाव के लिए उपवास कर रहे है और हम उनके साथा है। इसलिए हमने उन्हे मुफ्त में यह एसी हॉल उपलब्ध कराने का निर्णय किया है, लेकिन अन्य राजनैतिक पार्टियों द्वारा इस बात का विरोध होने पर मोदी ने इसका किराया देने का निर्णय किया है। गुजरात सरकार मोदी के उपवास स्थान का 15 लाख रूपए भुगतान करेगी। सभी खर्च चेक भुगतान के जरिये किए जाएंगे। गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी 17 सितम्बर से सुबह 9 बजे इसी हॉल में उपवास पर बैठेंगे। जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित कई बडे नेता शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि 17 सितम्बर को नरेन्द्र मोदी का 61वां जन्मदिन भी है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की 17 सितंबर से शुरू हो रहे सद्भावना उपवास की तैयारियां जोर-शोर से की जा रही है। गौरतलब है कि दंगों में मोदी की भूमिका का मामला सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत को भेजे जाने के बाद मोदी ने उपवास का ऐलान कर दिया है। सूत्रों की मानें तो उपवास के बहाने और सद्भावना की बात कर मोदी न सिर्फ अपनी छवि बदलने की फिराक में हैं, बल्कि राजनीतिक कद बढ़ाने की फिराक में भी हैं। गौरतलब है कि गुजरात यूनिवर्सिटी एक्जीबिशन हॉल में मोदी 17 तारीख से अपना उपवास शुरू करेंगे। इस राजनीतिक कार्यक्रम के लिए खास तैयारियां की जा रही हैं। यह हॉल पूरी तरह से वातानुकूलित है, लेकिन मोदी पर ठंडी हवा के बीच आराम से उपवास करने का इल्जाम न लगे इसके लिए हॉल में 100-150 पंखे लगाए जा रहे हैं। हॉल में दो से तीन हजार लोग बैठ सकते हैं। मोदी आतंकवादियों की हिटलिस्ट में हैं, उन्हें जेड प्लस की सुरक्षा भी मिली हुई है। लिहाजा उपवास स्थल की सुरक्षा के लिए सैकड़ों पुलिसवालों की ड्यूटी लगाई जा रही है। मोदी 17 तारीख से अगले तीन दिनों और चौबीसों घंटे यहीं रहेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री मोदी दो दिन के उपवास पर बैठ चुके हैं, लेकिन उस वक्त उपवास की वजह और माहौल अलग था। नरेंद्र मोदी ने यूनिवर्सिटी एक्जीबिशन हॉल के करीब ही मौजूद मैदान में 2007 में अनशन किया था। वह अनशन नर्मदा बांध की ऊंचाई बढ़ाने के मुद्दे पर था और दो दिन में ही खत्म हो गया था। सूत्रों की मानें, तो नरेंद्र मोदी यह साबित करना चाहते हैं कि दस साल पुराने दंगे अब समाज और राजनीति को भूल जाना चाहिए। अपने संदेश में मोदी ने लिखा है कि लगभग 10 वर्षों से गुजरात और मुझे बदनाम करने का फैशन-सा हो गया था। गुजरात के विकास की बात अथवा प्रगतिशीलता को सहन न कर पाने वाले लोग गुजरात को बदनाम करने का एक भी अवसर जाने नहीं देते थे। गुजराती में एक कहावत है वैर से वैर को नहीं जीता जा सकता। नकारात्मकता को पीछे छोड़कर सकारात्मकता के मार्ग पर आगे बढ़ने का यह उत्तम अवसर हमें मिला है। जानकारों की मानें, तो मोदी की राजनीति साफ है। तीन दिन के उपवास के जरिए वे 2014 के आम चुनाव का नक्कारा बजा रहे हैं। वे भाजपा आलाकमान को यह दिखाना चाहते हैं कि पार्टी में आग उगलने वाले नेता भले ही कई हों, लेकिन वोट वही बंटोरेंगे, रथयात्रा भले ही कोई भी निकाले लेकिन भगवा ब्रिगेड तो उन्हें ही प्रधानमंत्री पद की रेस में आगे मानती है। वहीं, मोदी का उपवास राजनीति में खलबली मचा रहा है। जहां कांग्रेस सकते में है, वहीं भाजपा के दिल्ली में बैठे नेता भी मोदी के कद बढ़ाने वाले तीर की चुभन महसूस कर रहे हैं।
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